भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 131, कुल 548 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 131

अ० १८ ] भाषाटीकासमेता । (९९) अथ कत्थाका गुण । खदिरः कफपित्तघ्नः कण्ठ्यः कुष्ठनिबर्हणः ॥ ३० ॥ कत्था कफको और पित्तको नाशता है, कंठमें हित है, कुष्ठको दूर करता है ॥ ३० ॥ अथ चूनेका गुण । चूर्णकं पित्तहत्तीक्ष्णं ताम्बूलं कफवातजित् ॥ ३१ ॥ संयोगा- त्सुरसं स्वादु मुखवैरस्यनाशनम् ॥ दन्तस्थैर्यकरं शोषपीनसा- मयशान्तिकृत् ॥ ३२ ॥ चूना पित्तको हरता है, तीक्ष्ण है और नागरपान कफको और वातको जीतता है परंतु संयोगसे सुन्दर रसवाला है, स्वादु है और मुखके विरसपनेको हरता है ॥ ३१ ॥ और दांतोंको स्थिर करता है और शोष, पीनस इनको शांत करता है ॥ ३२ ॥ अथ कत्था कपूरसे संयुक्त नागरपानका गुण । रोगपाटवसंशुद्धिस्वरकान्तिकरं मतम्॥कण्ठ्यं रुच्यमुरस्यं च फलकर्पूरसंयुक्तम् ॥३३॥इति आत्रेयभाषिते हारीतोत्तरे प्रथम- स्थाने फलवर्गो नाम सप्तदशोऽध्यायः ॥ १७ ॥ कत्था, कपूरसे संयुक्त किया नागरपान रोगको शोधता है, स्वरको और कांतिको करता है, कंठमें हित है, रुचिको उपजाता है और छातीमें गुणको करता है ॥ ३३ ॥ इति बेरीनिवासि- बुधशिवसहायसूनुवैद्यरविदत्तशास्त्र्यनुवादितहारीतसंहिताभाषाटीकायां प्रथमस्थाने फलवर्गो नाम सप्तदशोऽध्यायः ॥ १७ ॥ अष्टादशोऽध्यायः १८. अथ मधुवर्ग । अतो वक्ष्यामि माक्षीकं त्रिविधं शृणु पुत्रक ॥ भ्रामरं सारघं क्षौद्रं तेषां वच्मि गुणागुणम् ॥ १ ॥ अब शहदको कहूँगा । हे पुत्र ! वह शहद तीन प्रकारका है सुनो । भ्रामर १, सारघ २, क्षौद्र ३ इनके गुणोंको और दोषोंको कहता हूँ ॥ १ ॥ अथ सामान्यशहदका गुण । शीतं कषायं मधुरं लघु स्यात्सन्दीपनं लेहनमेव शस्तम्॥संशो- धनं च व्रणशोधनं च संरोपणं हृद्यतमं च बल्यम्॥२॥त्रिदोष-