भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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(१२८) हारीतसंहिता। [द्वितीयस्थाने- वात, पित्त, भय, हीनबल, मूत्रकी शंका, पित्तका संयोग इनके संयोगसे उपजे ये छः स्वप्न वर्जित हैं ॥ २ ॥ अथ कालसे स्वप्नफल । संवत्सरेण फलदो हि भवेन्निशायां स्वप्नोऽशुभस्य प्रहरे च शुभस्य वाद्ये ॥ स्याद्वत्सरार्द्धमतियाममथ द्वितीये मासत्रयेण फलदो भवति तृतीये ॥ ३ ॥ निशावसाने प्रवदन्ति किञ्चिद- शाहकः स्यात्फलदो मनुष्ये॥वर्षादिने स्यात्तमुशन्ति शान्ताः षाण्मासिको मध्यदिने प्रदिष्टः॥ ४ ॥ रात्रिके प्रथम पहरमें आया स्वप्न एक वर्षमें शुभ फलको देता है और दूसरे पहरमें आया स्वप्न छः महीनोंमें फलको देता है और तीसरे पहरमें आया स्वप्न तीन महीनोंमें फलको देता है ॥ ३ ॥ रात्रिके अन्तमें आया स्वप्न दश दिनमें फलको देता है और वर्षामें दुपहरीके समय आया स्वप्न छः महीनोंमें फलको देता है ॥ ४ ॥ अथ स्वप्नमें शुभ द्रव्य । स्वप्नेषु शुभ्राणि शुभानि धीराः सर्वाणि चेमानि विवर्जयित्वा ॥ कार्पासभस्मास्थिकपालशूलं कुर्यान्नराणां विपदं रुजं वा॥५॥ सब श्वेत पदार्थ स्वप्नमें दीखे शुभ कहे हैं,कपास, भस्म,हड्डी, खोपरी छोड़कर इनका दर्शन स्वप्नमें होवे तो मनुष्योंको दुःख अथवा रोग उपजता है ॥ ५ ॥ अथ अशुभद्रव्य । सर्वाणि कृष्णानि विनिन्दितानि स्वप्ने नराणां विपदं रुजं वा ॥ कुर्वन्ति चैतानि हि वर्जयित्वा गोवाजिराजद्विजहस्तिमत्स्यान्६॥ और स्वप्नमें सब प्रकारकी काली चीज निंदित है, जो स्वप्नमें काली चीज दीख जावे तो सिवाय इनके काली गौ, घोडा, राजा ब्राह्मण, हाथी और मत्स्य मनुष्योंको दुःख अथवा रोग उपजता है ॥ ६ ॥ अथ शुभ स्वप्नोंका वर्णन । मुकुरकुसुमशृङ्गारातपत्रं ध्वजं वा दधि फलमथ वस्त्रं चान्नताम्बू- लवस्त्रम्। कमलकलशशंखं भूषणं काञ्चनस्य भवति सकलसंप- च्छ्रेयसे रोगिणां च॥ ७ ॥ शीशा, फूल, श्रृंगार, छत्र,ध्वजा, दही, फल, वस्त्र, अन्न, नागरपान, कमल, कलश,शंख, सोनेका गहना इनको स्वप्नमें देखना सब प्रकारका सुख और रोगियोंको कल्याण देता है ॥७॥