भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 176

( १४४ ) हारीतसंहिता । [ द्वितीयस्थाने पुण्ययोगात्॥ जीवेद्यदा कथमसौ घनदत्तयन्त्रघोरान्तरेण तप- नेन कथं सुखं स्यात् ॥ ३ ॥ आदित्येनानुराधा वसति हिम- रुचिश्चोत्तरासंप्रयुक्तो भौमः पित्रीशयुक्तो बुध इति तुरगीयुक्त एतत्सुखं ना॥ तस्माज्जीवेन युक्तो मृगशिरसहितोऽश्लेषया भार्ग- सूनुर्युक्तोऽर्किर्हस्तसंज्ञैर्न तु वदति शुभं शास्त्रवियोगयुक्तः ॥४॥ रविवारसे युक्त मघानक्षत्र और सोमवारसे युक्त विशाखा नक्षत्र और मंगलवारसे युक्त आद्र्रानक्षत्र और बुधवारसे युक्त मूलनक्षत्र और बृहस्पतिवारसे संयुक्त कृत्तिकानक्षत्र और शुक्र- वारसे युक्त रोहिणी और शनिवारसे युक्त हस्तनक्षत्र ॥२॥ इन्होंको पंडित यमघंटयोग कहते हैं, इसमें रोगको प्राप्त हुआ मनुष्य पुण्यके योगसे कदाचित् जीता है अन्यथा सुखकी प्राप्ति नहीं है, क्योंकि भयंकर वह यन्त्र जिसमें आग भी लगी हो उससे कैसे कोई बच सकता है ? ॥ ३ ॥ रविवारसे संयुक्त अनुराधा और चंद्रवारसे संयुक्त उत्तरानक्षत्र और मंगलवारसे युक्त मघा और बुधवारसे युक्त अश्विनी और बृहस्पतिवारसे युक्त मृगशिर और शुक्रवारसे युक्त आश्लेषा और शनिवारसे संयुक्त हस्तनक्षत्र ये मृत्युयोग हैं। इनमें रोगोंकी उत्पत्ति होवै तो शुभ नहीं होता है॥४॥ अथ अमृतयोगकथन । दिनकरकरयुक्तः सोमसौम्येन वा पि तुरगसहितभौमः सोमपुत्रोऽ- नुराधा ॥ सुरगुरुरपि पुष्ये रेवती शुक्रवारे दिनकरसुतयुक्ता रोहिणी सौख्यहेतुः ॥ ५ ॥ रविवारसे युक्त हस्त और सोमवारसे युक्त मृगशिर और मंगलवारसे संयुक्त अश्विनी और बुधवारसे संयुक्त अनुराधा और बृहस्पतिवारसे युक्त पुष्य और शुक्रवारसे युक्त रेवती और शनिवारसे संयुक्त रोहिणी ये शुभयोग हैं इनमें रोग उपजे तो सुख होता है ॥ ५ ॥ अथ क्रूरयोगवर्णन । शूले वज्रेऽतिगण्डे वा व्याघाते व्यतिपातके॥ विष्कम्भयोगयुक्ते च नक्षत्रे क्रूरदैवते ॥ ६ ॥ एतैरसाम्ध्या ज्वरिणस्तस्माद्योगान् परीक्षयेत् ॥ योगे ऋक्षे तथा वारे क्रूरे प्राप्ते न जीवति ॥ ७ ॥ शूल, वज्र, अतिगंड, व्याघात, व्यतीपात, निष्कंभ इन योगोंमें जब क्रूरदेवताओंवाले अर्थात् आश्लेषा मघाआदिनक्षत्र होवें उन्हें क्रूरयोग कहते हैं ॥ ६ ॥ इनमें ज्वर उपजे तो रोगी असाध्य होजाते हैं इस वास्ते योगोंकी परीक्षा करनी और यह क्रूर योग भी हो और उसमें क्रूरवार हो तब रोग उपजे तो रोगी जीता नहीं ॥ ७ ॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu