हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १५४ ) हारीतसंहिता । [ द्वितीयस्थाने-
सहचरीसमिद्भिर्ज्येष्ठां काण्डात्काण्डेति शतावरीसमिद्भिर्मूलमिष्टं स्तौति ॥ निशायुगसमिद्भिः पूर्वाषाढामउत्तराषाढां मधुवातेति उदुम्बरसमिद्भिः श्रवणं त्र्यम्बकमिति बिल्वसमिद्भिर्वासवप्रभृती- नि होमयेत् घृतेन पूर्णाहुतिं दद्यात् ॥ नवग्रहस्थापनं चतुरस्रेण होमकुण्डे होमयेत् ॥ तस्मादभिषेकस्नानमाचरेत् ॥ शुक्लव- स्त्रोपवीतं यज्ञोपवीतसहितं रोगिणं कृत्वा वेदादिभिराशिष्य गोभूवस्त्रहिरण्यादिदानं कुर्यात् ॥ इति विधाने कृते सम्यक् शान्तिर्भवति ॥४॥ इति आत्रेयभाषिते हारीतोत्तरे द्वितीयस्थाने होमविधिर्नाम सप्तमोऽध्यायः ॥ ७ ॥ चंदन, लालचंदन, गोरोचन, हल्दी, गेरू, नीमकी छाल, बेलगिरी, कदंब, केशर, कस्तूरी, कपूर, कमल, देवदार, हरिचंदन, पद्माख, हल्दी, दारुहलदी, कालाअगर, अगर, शीसम, गोरोचन, पलाश अर्थात् ढाका ये सब गंध हैं। श्वेतकमल, बेलगिरी, तुलसी, दूब, कुशा, अरनी, जांटीके पत्ते, आक, टेसू, कनेर, विष्णुक्रांता, नीलाकरसैला, शतावरी इनके फूल, जामन और आंबके पत्ते और कचनार, पाडल, रानतुलसी, अगस्तिवृक्ष, काकजंघा, अशोक इनके फूल, धूपदीपादिसे अलंकृतकिये वास्तुमण्डको कर ईशानआदिके क्रमसे नक्षत्रमण्डलकी पूजा करनी तिस मण्डलके मध्यमें सूर्य्यआदिग्रहोंकी अच्छीतरह पूजाकर क्रमसे पूर्वोक्त समिधोंसे होमको करे उससे पीछे फिर दही, शहद, घृत इनसे भिगोई हुई पूर्वोक्त समिध अर्थात् लकड़ियोंसे अश्विनी आदिनक्षत्रोंके क्रमकरके होम करे 'आकृष्णेन रजसा' इसमंत्रसे और आककी लकड़ीसे अश्विनीके लिये होम करे, पीछे 'इदं अश्विन्यै' ऐसे कहे। 'विष्णोराट' इसमन्त्रसे ढाककी लकड़ियों करके भरणीका होम करे अंतमें 'इदं भरण्यै' ऐसे कहे। 'मधुमाध्वी' इसमन्त्रसे और बडवेरीकी लकड़ियोंसे कृत्तिकाका होम करे। 'कांडात्कांडे' इस मन्त्रसे और पारिभद्र कुशा इन्होंकरके रोहिणी, मृगशिर, पुनर्वसु, आदिका होम करे। 'इदंदेव'इस मंत्रसे और पीपलकी लकड़ियोंकरके पुष्यका होम करे। 'ससत्यग्नि' इसमंत्रसे और आंबकी लकड़ियोंकरकै आश्लेषाका होम करे।'अग्निर्मूर्द्धा' इस मंत्रसे और जामुनकी लकड़ियोंकरकै मघाका होम करे।'सद्योजाताभि०'इसमन्त्रसे और श्वेतखैरकी लकड़ियोंसे पूर्वाका होम करे।'तत्पुरुषाय विद्महे'इसमन्त्रस और लालखैरकी लकड़ियोंकरकै तीनों उत्तराओंका होम करे 'नमो घोराय' इस मंत्रस और बहेड़ाकी लकड़ीकरके हस्तका होम करे 'नमो ज्योतिष्पतये' इसमन्त्रसे और लालशीसमकी लकड़ियोंकरकै चित्राका होम करे 'नमो देवाय नमो ज्येष्ठाय'इसमन्त्रसे और चंदनकी लकड़ियों करके स्वातीका होम करे और इसीमंत्रसे तथा गूलर और अरनीकी लकड़ियों ९ करकै विशाखाका होम करे, 'बृहते