भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 187

अ० ८] भाषाटीकासमेता । ( १५५ ) 'इतियदुपतये०' इसमन्त्रसे और शीसमकी लकड़ियोंकरके अनुराधाका होम करे, 'एतज्ज्योति ०' इस मंत्रसे और पीला कुरंटाकी लकड़ियोंकरके ज्येष्ठाका होम करे, 'कांडात्काण्डे' इस मन्त्रसे और शतावरीकी लकड़ियोंकरके मूलका होम करे, नामरूपमन्त्रसे और हल्दी तथा दारुहल- दीकी लकड़ियोंसे पूर्वाषाढ और उत्तराषाढका होम करे, 'मधुवाता' इस मन्त्रसे और गूलरकी लकड़ियोंसे श्रवणका होम करे, त्र्यंबकमन्त्रसे और बेलपत्रकी लकड़ियोंसे धनिष्ठाआदि और रेवती तकके नक्षत्रोंका होम करे, घृतकरके पूर्णाहुतिको देवे, नवग्रहोंको चौकुँड़ीवेदीपै स्थापन कर पीछे होमके कुंडमें होमको करे, तिससे पीछे अभिषेकस्नानको करे, सफेद वस्त्रोंको पहने हुए और यज्ञोपवीत अर्थात् जनेऊको धारण किये ऐसे रोगीको बना और वेदआदिके मन्त्रोंसे आशीर्वाद दे- पीछे रोगी गौ, पृथिवी,सोना,आदिको दान करे ऐसे विधान करनेसे अच्छीतरह शांति होतीहै ४॥ इति बेरीनिवासिबुधशिवसहायसूनुवैद्यरविदत्तशास्त्र्यनुवादितहारीतसंहिता- भाषाटीकायां द्वितीयस्थाने होमविधिर्नाम सप्तमोऽध्यायः ॥ ७ ॥ अष्टमोऽध्यायः ८. अथ दूतकी परीक्षाका लक्षण । आत्रेय उवाच॥अथातो गदग्रस्तानां दूतारिष्टं भिषग्वर ॥शुभं वाशुभमेवान्यत्समासेन प्रवक्ष्यते ॥ १॥ आतुरस्योपकारार्थं दूतो याति भिषग्गृहे॥तस्य परीक्षणं कार्य्यं येन संलक्ष्यते गदः२॥ आत्रेयजी कहते हैं--हे वैद्यवर ! अब रोगोंसे ग्रस्तहुए मनुष्योंके दूतारिष्टको विस्ता- से कहताहूँ जो शुभ और अशुभ होता है ॥१॥ रोगीके उपकारके लिये जो दूत वैद्यके घर- को जाता है उसकी परीक्षा करनी चाहिये जिससे रोगका शुभाशुभ मालूम होवे ॥ २ ॥ अथ वर्ज्यदूतके लक्षण । खञ्जान्धमूकबधिरं रुजपीडितं वा बालं स्त्रियञ्च विकलं तृषितं विजीर्णम् ॥ श्रान्तं क्षुधातुरमपि अमितञ्च दीनं दूतं न शस्त- मिह वेदविदो वदन्ति॥३ ॥ कषायकृष्णाईकवाससा च तथैव वस्त्रावृतमस्तकेन ॥ अश्रुप्लुतैर्वा नयनैश्च युक्ताः केशैस्तथा मुण्डितमस्तकञ्च ॥ ४ ॥ समर्कटाक्षोर्ध्वशिरोरुहश्च खर्वस्तथा