हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १५६ ) हारीतसंहिता । [ द्वितीयस्थाने- वामनकृत्तनासः॥एतान्न शसन्ति विदो मुनीन्द्रा दूतान्नराणां रुजनाशनाय ॥५॥ यः कर्कशः क्रोधनपाशपाणिर्भिषग्विदूषी तमसावृतश्च॥एते न शस्ताः प्रवदन्ति धीरा दूता विकारञ्च प्रवर्द्धयन्ति ॥६॥ यः काष्ठहस्तोद्धतपाशपाणिस्तथातुरो दीन- वचो हिरोदिति ॥प्रक्लिन्ननेत्रो गमनोत्सुकोऽपि वर्ज्यो रुगार्त्तो- ऽशुभकारिदूतः॥७॥यो रज्जुहस्तोद्धतपाशपाणिर्याम्यां दिशं च परिभूय तूणम् ॥यो वावदीति प्रबलं सरोषस्तथा समागम्य वदेच्च दूतः ॥ ८॥ हस्तेऽवष्टभ्य लगुडं वक्रपादेन तिष्ठति ॥ तस्मादाकुलवादी यो न शस्तो वैद्यकर्मसु ॥९॥ पथा गच्छति शीघ्रण आविश्योत्थाय मुह्यति॥पादौ प्रसार्य्य विशति मस्तके विन्यसेत्करम् ॥१०॥ भिनत्ति लोहकाष्ठञ्च तृणं वा स्फोटते क्वचित् ॥ एतानि स्पृशते नासां स्तनं वा स्पृशति पुनः॥११॥ भूमिं लिखति पादेन रेखां वापि करोति यः॥निद्रां वा कुरुते यस्तु स दूतोऽनिष्टकारकः ॥ १२ ॥ लंगड़ा, अंधा, गूंगा, बहिरा, रोगसे पीडित, बालक, स्त्री, विकल, तृषावाला, अतिवृद्ध, परिश्रमको प्राप्त हुआ, भूखसे पीडित और श्रमवाला और दीन ऐसे दूतको वैद्य श्रेष्ठ नहीं कहते हैं ॥ ३ ॥ रंगा हुआ और काला और गीला ऐसे वस्त्रसे युक्त और वस्त्रसे आवृत हुए मस्तकवाला और आँसुओंसे भीजे हुए नेत्रोंवाला और जटाजूट हुआ और मुंडाये हुए शिरके बालोंवाला ॥ ४ ॥ और वानरकेसे नेत्रोंवाला और ऊपरको खुले हुए बालोंवाला और ढींगना तथा कटी हुई नासिकावाला ऐसे दूतोंको मुनींद्र रोगका नाशके लिये श्रेष्ठ नहीं कहते हैं॥५॥ जो कठोर हो, क्रोधी हो और फांसीको हाथमें लेनेवाला और वैद्यको दोष लगानेवाला और तमोगुणसे संयुक्त ऐसे दूत अच्छे नहीं हैं, किंतु ये दूत विकारको बढ़ाते हैं ॥ ६ ॥ जो काष्ठको हाथमें लिय हो और ऊपरको हाथ किये फांसीको ग्रहण करनेवाला हो, रोगी हो और दीनवचनको बोलके रोता हुआ है और भीजेहुए नेत्रोंवाला हो और गमन करनेकी इच्छावाला हो ऐसा अशुभको करनेवाला दूत वर्जना चाहिये ॥ ७ ॥ जो रज्जुको हाथमें लेके ऊपरको लिये हुए हो और फांसीको हाथमें लिये हुए हो और जो दक्षिण दिशामें प्राप्त होके क्रोधसे बारंवार बोले और वैद्यसे भी दक्षिणदिशामें स्थित होके बोले ऐसा दूत श्रेष्ठ नहीं है ॥ ८ ॥ जो लकड़ीको हाथमें लेके टेढ़ेपैरसे स्थित होवे और बुरे वचनको बोले ऐसा दूत वैद्यकर्ममें Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu