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हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 195, कुल 548 में से

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पृष्ठ 195

दिष्टः कासात्पीनस एव च ॥ १० ॥ तस्मात्क्षयः क्षयाच्छोफो शोफेनाऽपि मृतिं व्रजेत् ॥ दिनमें शयन करने आदिसे जुखाम उपजताहै उस जुखामसे खाँसी और खाँसीसे पीनस उप- जता है॥१०॥ और पीनससे क्षय और क्षयसे शोजा उपजता है और शोजासे मरजाता है ॥ अथ महाभयंकर रोग। ज्वरः क्षयश्च यक्ष्मा च कुष्ठगुल्मार्शसंग्रहाः ॥ ११॥ शर्करा मेह उन्मादोऽपस्मारस्तु भगन्दरः॥ एते महाघोरतरा याप्यं कुर्वन्ति मानवम् ॥ १२ ॥ और ज्वर, क्षय, राजरोग, कुष्ठ, गुल्म, बवासीर ॥ ११ ॥ शर्करा,प्रमेह, उन्माद,मृगीरोग, भगंदर ये अत्यंत महा घोर रोग हैं, ये मनुष्यको कष्टसाध्य कर देते हैं ॥ १२ ॥ अथ सर्वव्याधियोंका हेतु । वातपित्तादयो दोषास्तथा श्लेष्मसमुद्भवाः ॥ जायन्ते व्याधयः सर्वे तेषां वक्ष्याम्युपक्रमम् ॥ १३ ॥ वात और पित्तसे तथा कफसे उपजे सब रोग होते हैं उनके उपचारको कहता हूं ॥ १३॥ अथ वातादिदोषोंका पाचनकाल । वातः पचति सप्ताहात्त्रिरात्रात्पित्तमेव च॥ श्लेष्मा सार्द्धदिनेनापि विपचेद्भिषजां वर ॥ १४ ॥ द्वन्द्वजं वातपित्तञ्च नवरात्रेण पच्यते ॥ श्लेष्मवातौ दशाहेन पञ्चाहात्पित्तश्लैष्मिकम् ॥१५॥ शमनाय च द्वन्द्वानां तुर्याह्नात्पाचनं तथा ॥ त्रिदोषस्य च घोरस्य पाचनं द्वादशे दिने ॥ १६ ॥ सन्निपातश्च पचति चतुर्दशदिनैरपि ॥ वातदोष सात दिनमें पकता है, पित्तदोष तीन दिनमें पकता है, हे वैद्यवर ! कफदोष डेढ़दिनमें पकजाता है ॥ १४ ॥ मिलेहुए वात पित्त ९ नव दिनोंमें पकते हैं, मिलेहुए कफ और वात दशदिनमें पकते हैं, मिलेहुए पित्त और कफ पांच दिनमें पकते हैं ॥ १५ ॥ मिलेहुए दो दोषोंकी शांतिके लिये चार दिनमें पाचन हित है और घोररूपत्रिदोषमें बारहवें दिन पाचन हित् है ॥ १६ ॥ चौदहदिनोंकरके भी सन्निपात पकता है ॥ अथ पाचनादिक्रियाका समय । ज्ञात्वा दोषबलं पक्कं तस्माद्देयन्तु पाचनम् ॥ १७ ॥ युक्तं निदानलक्षैस्तु तस्मात्संशमनक्रिया ॥

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