भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 237, कुल 548 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 237

अ० २ ] भाषाटीकासमेता । ( २०५ ) अथ गुडपिप्पली । कासाजीर्ण श्वासहृत्पाण्डुरोगे मन्दे वाग्नौ कामलारोचके च॥ तेषां शस्ता पिप्पली स्याद्गुडेन हन्ति नृणांजीर्णमाशु ज्वरंच २०० गुडमें संयुक्त करी पीपल खांसी, अजीर्ण, श्वास्रोग, पांडुरोग, मंदाग्नि, कामला, अरोचक, जीर्णज्वर इन्होंको शीघ्र हरती है ॥ २०० ॥ अथ लघुपंचमूलक्वाथ । लघुपञ्चमूलीकथितः कषायश्छिन्नोद्भवायाः सह पिप्पलीभिः॥ जीर्णज्वरे श्वासकफामयघ्नो मन्दाग्निशूलारुचिपीनसानाम्॥२०१ शालपर्णी, पिठवन, छोटी कटेली, बड़ी कटेली,गोखरू इन्होंके क्वाथको अथवा गिलोयके क्वाथमें पीपलका चूर्ण मिला पीवे तो जीर्णज्वर, श्वास, कफका रोग, मंदाग्नि,शूल, अरुचि, पीनस इन्होंका नाश होता है ॥ २०१ ॥ अथ जीर्णज्वरपर पटोलादि क्वाथ । पटोलपाठाकटुरोहिणीनां फलत्रय वत्सकनिम्बमोक्षाः ॥ द्राक्षामृताचन्दननागराणां क्वाथः पुराणज्वरनाशनाय ॥२०२॥ परवल, श्योनापाठा, कुटकी, हरड़े, बहेड़ा, आंवला, इंद्रजव, नींवकी छाल, मोखावृक्ष, दाख, गिलोय, चंदन और सोंठ, इनका क्वाथ पुराने ज्वरको नाशता है ॥ २०२ ॥ अथ विषमज्वरका औषध । सजीरकं गुडं भक्षेत्सगुडां वा हरीतकीम्॥सगुडांन्वा तिलान्भ- क्षेज्ज्वरे च विषमानुषे ॥२०३॥ सगुडं त्रिफलाक्वाथं संभक्षेद्वा गुडार्द्रकम्॥क्वाथोऽपि विषामाणान्तु ज्वराणां नाशकारकः२०४ गुडसहित जीराको अथवा गुडसहित हरडैको अथवा गुडहित तिलोंको खावे यह विषम ज्वरको नाशता है ॥२०३ ॥ गुडसहित अदरख अथवा गुडसहित त्रिफलाके क्वाथको पीवे यह विषमज्वरोंको नाशता है ॥ २०४ ॥ अथ चातुर्थिकज्वरका उपाय । वासाधात्रीफलं दारुपथ्यानागरसाधितः ॥ मधुना संयुतः क्वाथश्चातुर्थिकनिवारणः ॥ २०५ ॥ वांसा, आंवला, देवदार, हरडै, सूंठके क्वाथमें शहद डाल पीवे । यह चातुर्थिकज्वरको नाशता है ॥ २०५ ॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu