हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 253, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ेंअ० ३ ] भाषाटीकासमेता । ( २२१ ) अथ धान्यादि क्वाथ । धान्यनागरमुस्ता च वालकं बालविल्वकम् ॥ बला नागबला चेति क्वाथो रक्तातिसारिणाम् ॥ ५५ ॥ धनियां, सोंठ, नागरमोथा, नेत्रवाला, कच्ची वेलगिरी, खरेंहटी, वडी खरेंहटी इनका क्वाथ रक्तातिसारवालोंको हित है ॥ ५५ ॥ अथ दाडिमादिक्वाथ । दाडिमं च कपित्थं च पथ्याजंब्वाम्रपल्लवान् ॥ पिष्ट्वा देया मस्तुयुक्ता रक्तातीसारवारणाः ॥ ५६ ॥ अनार, कैथ, हर्रैं, जामुन और आंबके पत्तोंको पीसकर दहीके पानीमें देवे । यह क्वाथ रक्तातिसारको नाशता है ॥ ५६ ॥ अथ गुडबिल्वादियोग । गुडेन पक्वं दातव्यं बिल्वं रक्तातिसारिणे ॥ दध्ना वा मधुना पथ्या रक्तातीसारनाशिनी ॥ ५७ ॥ पकाहुआ बेलगिरीका फल गुड़के साथ रक्तातिसारवालेको देना अथवा हर्र शहदके अथवा दहीके साथ देना इससे रक्तातिसारका नाश होता है ॥ ५७ ॥ अथ वत्सकावलेह । वत्सकातिविषानागराभयामस्तुसंयुतः ॥ लेहः शस्तोऽस्ति मधुना रक्तातीसारनाशनः ॥ ५८ ॥ कूडा, अतिश, सोंठ, हरड़ें इन्होंको पीस शहद और दहीके पानीमें मिला पीवे यह रक्ता- तिसारको दूर करता है ॥ ५८ ॥ अथ कुटजादिचूर्ण । कुटजत्वक्च पाठा च विश्वं बिल्वं च धातकी ॥ मधुना सहितं चूर्णं देयं रक्तातिसारनुत् ॥ ५९ ॥ कूडाकी छाल, पाठा, सूंठ, बेलगिरी, धवके फूल, इनके चूर्णको शहदमें मिला देवे । यह रक्तातिसारको हरता है ॥ ५९ ॥ अथ सन्निपातके अतिसारका लक्षण और चिकित्सा । वराहवासाससदृशं तिलाभं मांसधावनाभासम् ॥ पक्वजम्बूफलसदृशं सन्निपातः प्रवहताम् ॥ ६० ॥