भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 302

( २७० ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने- शुक्रके क्षयमें अच्छीतरह पकाये हुए रस देने हित हैं और नौनीतघृत, दूध, मधुर पदार्थ, इनका सेवन करे ॥ ३६ ॥ काकडीकी जड़ विदारीकंद, शालवन,इनको दूधके संग मिश्री मिला पान करना हित है और मीठे पदार्थ हित हैं॥३७॥ अब आगे वीर्यकी वृद्धि करनेवाले चूर्णोंको कहेंगे ॥ ३८ ॥ अथ बलादि चूर्ण । बला विदारी लघुपञ्चमूली पञ्चव क्षीरद्रुमत्वक् प्रयोज्या ॥ पुनर्नवामेघतुगायुतं स्यात्सजीवनीयैर्मधुकैः समांशैः ॥ ३९ ॥ अक्षप्रमाणानि समानि तानि सर्वाणि चैतानि विचूर्णयित्वा ॥ विमिश्रयेत्तत्र कणाशतानि यवान्नगोधूमयवांश्च पिष्ट्वा ॥ ४० ॥ तुगासमांशं सिततण्डुलानां सेयं सुशृङ्गारकमिश्रितं तु॥ प्राकर्ण- कार्डेन वियोजनीयं सर्वांशकेनापि सिता प्रयोज्या ॥ ४१ ॥ विभावयेच्चामलकीरसेन वारत्रयं गोपयसा विभाव्य॥ ततोऽस्य सर्वैश्च सशर्करैर्वा घृतेन चैवं पुनरेव भाव्यम्॥४२॥ तं भक्षये- त्क्षौद्रयुतं पलार्द्धं जीर्णे च भोज्यं कटुकाम्लवर्जम् ॥ क्षीरं घृतं वा सितशर्करां वा यवान्नगोधूमकशालिभक्ष्यान् ॥ ४३ ॥ ज्ञात्वाग्निपाकं जठरे नरस्य देयो विधिज्ञैः क्षयरोगशान्त्यै ॥ पथ्यक्षये श्रान्तचिराभितापसंपीडितानां च तथा शिरोऽर्ती ॥४४॥ पित्तातुराणां रुधिरक्षयाणां श्रमाध्वसंपीडितकामला- नाम्॥श्वासातुराणां मधुमेहिनां च क्षीणेन्द्रियाणां बलकारि शस्तम्॥४५॥ गर्भो गृहीतश्च यया स्त्रिया च तस्याः प्रशस्तं तु बलादिचूर्णम् ॥ ४६ ॥ इति बलादिचूर्णम् ॥ खैरहटी, विदारीकंद, लघुपंचमूल अर्थात् सालवन, पिठवन,कटेहली, बडी कटेहली, गोखरू पीपल,वड, गूलर, पिलखन, आंव इन पांच वृक्षोंकी छाल प्रयुक्त करनी चाहिये और सूंठ, नागरमोथा, वंशलोचन और जीवनीआदिक गण औषध मुलहटी इन सबोंको समान भाग ॥ ३९ ॥ एक २ तोला प्रमाण ले फिर इन सबोंका चूर्ण बना उसमें सौ १०० पीपली मिला और जव, गेहूं ॥ ४० ॥ उत्तम सफेद चावल इनको वंशलोचनके समान