भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 352

( ३२० ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने- दलानि च ॥ तुलसीस्वरसञ्चैव शटी शृङ्गी मरीचकम् ॥३६॥ शुण्ठीचूर्णं गुडे युक्तं लिह्यात्कासे कफात्मके ॥ भार्ग्याश्च नागपिप्पल्याः पिबेत्क्वाथं सुखोष्णकम् ॥३७॥ आर्द्रकस्य रसं नीत्वा मधुना च पिबेत्सुधीः॥कासे श्वासे प्रतिश्याये ज्वरे श्लेष्मसमुद्भवे ॥ ३८ ॥ कट्फलं भूतृणं भार्गी शुण्ठी पर्पटकं वचा ॥सुराह्वं च जलशृतमुक्तञ्च पण्डितैस्तथा ॥३९ ॥ मधुना संयुक्तं पानं कासे वातकफात्मके ॥ श्वासे हिक्काज्वरे शोषे महा- कासे च दारुणे ॥ ४० ॥ खांड, खजूर, दाख, धानकी खील, पीपल, शहद इन औषधोंके चूर्णमें घृत मिला लेह बना चाटनेसे पित्तकी खांसी दूर होती है ॥ ३५ ॥ वांसाके पत्ते, नींवके पत्ते, तुलसीका रस और कचूर, काकड़ासींगी, मिरच ॥ ३६ ॥ सोंठ, इनका चूर्ण बना गुड़में मिला चाट- नेसे कफसे उपजी खांसी दूर होती है और भारंगी, गजपीपली इनका काथ सुखसे सुहाता हुआ गरम २ पीवे ॥ ३७ ॥ अदरखका रस निकाल शहदके संग पीना खांसी, श्वास, पीनस, कफसे उपजा ज्वर इनमें श्रेष्ठ है ॥ ३८ ॥ कायफल, रोहिषतृण, भारंगी, सोंठ, पित्तपापडा, वच, देवदार इनको जलमें पकावे ऐसे पंडितोंने कहाहै ॥ ३९ ॥ पीछे शहद मिला पीनेसे वात कफसे उपजी खांसी दूर होती है और श्वास, हिचकी, ज्वर, शोष, महा- दारुण खांसी इनमें श्रेष्ठ है ॥ ४० ॥ अथ लघुतालीसआदि औषध । तालीसपत्रं मरिचञ्च विश्वाश्यामायुतं चोत्तरभागवृद्धया ॥ त्वक्पत्रकेणापि लवङ्गमेलामष्टौ कणाया गुणितां सिताञ्च ॥ ॥ ४१ ॥ लिह्यात्प्रभाते श्वसने च कासे प्लीहारुचौ पीनसच्छ- र्द्दिहिक्काम् ॥ शोफातिसारं ग्रहणीं च पाण्डुं क्षयं निहन्यात्क्षतजं च यक्ष्मम् ॥ ४२ ॥ तालीसपत्र १, मिरच २, सोंठ ३, पीपल ४ इनको यथोत्तर वृद्धिभागसे ले और दालचीनी, तेजपात, लौंग, इलायची इनको मिला और पीपलसे आठगुनी मिसरी मिला ॥ ॥ ४१ ॥ फिर प्रभातसमयमें खानेसे श्वास, खांसी, प्लीह अर्थात् तिल्ली, अरुचि, पीनस, छर्दि, हिचकी, शोजा, अतिसार, संग्रहणी, पांडु रोग इन रोगोंका नाश होता है और चोटसे उपजा क्षय, राजयक्ष्मा इनको नाशता है ॥ ४२ ॥