भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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.अ० १२ ] भाषाटीकासमेता । ( ३१९ ) कायफल, रोहिषतृण, भारंगी, नागरमोथा, वच, धनिया, पित्तपापड़ा, देवदारु, दारुहलदी, सोंठ, काकड़ासिंगी ॥ २८॥ इनका कल्क बना शहद मिला पीना हित है। इस औषधसे खांसी और कफ दूर होता है ॥२९॥ क्षय, पीनस, कंठग्रह, वातसे उपजा शोष,कफ, हिचकी, कफसे उपजा ज्वर इनको नाशता है ॥ ३० ॥ अथ द्राक्षादि औषध । द्राक्षामलक्याः फलपिप्पलीनां कोलं सखर्जूरयुतोऽवलेहः ॥ निहन्ति कासं क्षयरक्तपित्तान् सकासलं पाण्डु हलीमकञ्च ॥३१॥ दाख, आंवला, पीपल, चव्य, खजूर इन्होंका अवलेह बना चाटनेसे रक्तपित्त, खांसी, क्षयरोग इनका नाश होता है, कामला, पांडुरोग,हलीमक इनको नाशता है ॥ ३१ ॥ अथ वालकादि कल्क । वालाबृहत्यौ मधुकं वृषं च तथैव कुष्ठं पिचुमन्दकञ्च ॥ गवास्तनीसंयुतकल्कमेतत्पानं हितं पित्तकफात्मके च॥ ३२ ॥ नेत्रवाला, छोटी कटेहली, बडी कटेहली, मुलहठी, वांसा, कूट, नींव, दाख इनका कल्क बना पित्तकफसे उपजी हुई खांसीमें पीना हित है ॥ ३२ ॥ अथ मुस्ता चूर्ण । मुस्ताटरूषकफलत्रिकदारुभाङ्गी व्याघ्रीसपुष्पफलमूलदलैरु- पेता॥रास्ना विषातुलसिका विहितं सुचूर्णं क्वाथेन हन्ति किल कासमिदं न चिन्त्यम् ॥ ३३ ॥ बद्धाथवा च गुटिका मधुना गुडेन सिन्धूद्भवैन मगधासमहौषधेन ॥ आस्ये धृता निशि वि- शालगुणा भवन्ति श्वासं क्षयं क्षतजकासमिदं निहन्ति ॥ ३४ ॥ नागरमोथा, वांसा, त्रिफला, देवदार, भारंगी और पुष्प, फल, मूल, पत्ते इन पंचांगोंसहित कटेहली, रास्ना, अतीश, श्रेष्ठ तुलसीके पत्ते, इनका चूर्ण बना, जलमें क्वाथ बना पीनेसे खांसी दूर होती है ॥ ३३ ॥ अथवा इस चूर्णको शहद तथा गुड़में मिला और सैंधानमक, पीपल, सोंठ ये मिला गोली बांध मुखमें धरे । रात्रीके समयमें यह उत्तम गुणवाली कही है और श्वास, क्षय, क्षतसे उपजी खांसी इनको नाशती है ॥ ३४ ॥ अथ पित्तकी खांसीकी चिकित्सा । शर्करा चवखर्जूरं द्राक्षा लाजा कणा मधु ॥ सर्पिर्युतो हितो लेहः पित्तकासनिवारणः ॥३५॥ आटरूषकपत्राणि पिचुमन्द-