भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 356

( ३२४ ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने-

होती है ॥ ६२ ॥ दाह तथा भ्रमवाली घोर पित्तकी छर्दिको देखि तहां अमलतासके पत्तोंकें रसमें शहद और खांड मिला पीना ॥ ६३ ॥ तथा नागरमोथा, खांड ये मिला दूधका पीना श्रेष्ठ कहां है ॥ ६४ ॥ अथ कफकी छर्द्दिकी चिकित्सा । जम्बूवाम्रकप्रवालानि दाडिमामलकं तथा॥ मस्तुनापोषितं पानं हन्त्याच्छ्लेष्मवमिं नृणाम् ॥६५॥ सर्ज्जार्जुनंधवकदम्बकलोलचूर्णं धान्याकशुण्ठिसहितं सगुडं प्रदद्यात् ॥ श्लेष्मोद्भवं वमनमाशु निहन्ति पुंसां लेहस्तथा मधुकणाक्रिमिहाशटीनम् ॥ ६६ ॥ जामुन, आंब इनके कोमल पत्ते, अनारदाना, आंवला, इनको दहीके मस्तुमें पीस पीनेसे मनुष्योंको कफसे उत्पन्न हुई छर्दि दूर होती है ॥ ६५ ॥ और रालवृक्ष, अर्जुनवृक्ष, धव कदंब, कंक़ोल, सूंठ, धनियां इनका क्वाथ बना गुड़ मिला पीनेसे कफसे उपजी छर्दि दूर होती है और कचूर, पीपल, शहद, वायविडंग इनका अवलेह बना चाटना हित है ॥ ६६ ॥ अथ एलादिचूर्णं । एलालवङ्गगजकेसरकोलसर्ज्जालाजाप्रियङ्गुघनचन्दनपिप्पली- नाम्॥चूर्णानि मार्कवसितासहितानि लीह्वा छर्दि निहन्ति कफ- मारुतपित्तजाञ्च॥६७॥एलादलानि गजकेसरकत्वगेलालाम- ज्जकं च दहनं च घनं प्रियङ्गुम्॥सचन्दनं मगधजासमचूर्णितञ्च लीह्वा सितासमत्रिदोषवर्मि जघान ॥ ६८ ॥ इलायची, लौंग, नागकेसर, चव्य, रालवृक्ष, धानकी खील, गोंदी, नागरमोथा, चन्दन, पीपल, भांगरा इनके चूर्णमें मिसरी मिला चाटनेसे कफवात पित्त इन दोषोंसे उपजी हुई छर्दि दूर होती है ॥ ६७ ॥ और इलायचीके पत्ते, नागकेशर, दालचीनी, इलायची, रोहिषतृण, चीता, नागरमोथा, गोंदी, चंदन, पीपल इनको समानभाग ले चूर्ण बना मिश्री मिला खानेसे त्रिदोषसे उपजी छर्दिका निवारण होता है ॥ ६८ ॥ अथ छर्दीकी शमनक्रिया । उर्ध्वभागगते दोषे रेचनं तु प्रशस्यते॥ तस्मिञ्झातेऽप्यधोभागं वमनं शाम्यति ध्रुवम् ॥६९॥ अथवा द्विभागगते तदा देया- भया मधु ॥ क्रिमिजं वमनं ज्ञात्वा क्रिमीणां शमनक्रिया ७० वमन व खांसीमें जो दोष उर्ध्वभागोंमें स्थित हो तो जुलाब दिवानी चाहिये और जो