भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 366

( ३३४ ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने- अथ नष्टसंज्ञमूर्च्छितकी चिकित्सा । मूर्च्छातुरं सकलशीतजलेन सिञ्चेत्संवीजयेच्च शिखिपिच्छकवी- जनैस्तु॥दोलायनं हि विहितं मनुजस्य मूर्च्छा मोहं भ्रमञ्च हरते च मदात्ययं वा ॥ २५ ॥ मूर्च्छासे पीडित हुए मनुष्यको शीतल पानीसे सींचे और मोरकी पंखोंके वीजनेसे हवा करे और दोलायन अर्थात् हिंडोलाके द्वारा झुलानेसे मूर्च्छा, मोह, भ्रम, मदात्यय इनका नाश होता है ॥ २५ ॥ अथ मूर्च्छा मद भ्रम इनकी चिकित्सा । करञ्जबीजं सह सैन्धवेन रसोनपत्रस्य रसं च यत्र ॥ मार्कं च पथ्यञ्च वचां जलेन पिष्ट्वाञ्जनं हन्ति दिनस्य तन्द्राम् ॥२६॥ घोटकलालारमरिचं लवणयुतं नेत्रयोरञ्जनं शस्तम्॥ विनिहन्ति दिनशतं तन्द्रां निद्रां वा मानुषस्य ॥२७ ॥ सुगन्धं सुकषा- योपयुक्ता रसस्त्रिफला गुडार्द्रकं प्रातः ॥ सप्ताहान्मधुरजलं हन्ति मदमूर्च्छाकरानुन्मादान् ॥ २८ ॥ रक्तकर्षणमिच्छन्ति मोहमूर्च्छाप्रशान्तये ॥ तस्मादवहितः कुर्य्यात्तासु रक्तावसेच- नम् ॥ २९ ॥ करंजुआके बीज, सेंधानमक, लहसनके पत्ताका रस, भंगरा, हरड़ै, बच, इनको पानीसे पीस अंजन करनेसे तंद्रा दूर होती है ॥ २६ ॥ घोड़ाकी लालोंसे काली मिर्च और सेंधा- नमकको पीस नेत्रोंमें आँजनेसे सौ १०० दिनोंतक मनुष्यकी तंद्रा और नींद दूर हो जाती है ॥ २७ ॥ चंदन, हरड़ै, बहेड़ा, आंवला, गुड़, अदरक इनको प्रभातमें खाके ऊपर मधुर जलको पीनेसे मद और मूर्च्छाको करनेवाले उन्माद दूर होते हैं ॥ २८ ॥ कुशल वैद्य मोह और मूर्च्छाकी शांतिके लिये रक्तको घटाना चाहते हैं इसवास्ते मोह मूर्च्छारोगमें सावधान मनुष्य रक्तको निकसावे ॥ २९ ॥ अथ मूर्च्छादिकोंके साधारण उपाय । शीतसेकावगाहाद्यान्श्रीखण्डं व्यजनानिलान् ॥ शीतानि चान्नपानानि सर्वमूर्च्छासु योजयेत् ॥ ३० ॥ शर्करैक्षुरसद्राक्षा- वातमूर्च्छाप्रपानकैः॥काश्मर्य्यमधुकैरेव पित्तमूर्च्छा जयेन्नरः ॥ ॥ ३१ ॥ यष्ट्याः क्वाथं शृतं सर्पिः शृतं वामलकीरसम् ॥ पिबे-