हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
पृष्ठ 376, कुल 548 में से
संदर्भ में पढ़ें( ३४४ ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने- च हितश्चैव शृणु चात्र प्रमाणकम् ॥ एवं प्रयोजितो रोगे महा- कल्को मतो बुधैः ॥ ३२ ॥ बलवान्गुणवांश्चैव भवतीह फल- प्रदः ॥ भिषग्भिः कथ्यते लेहः कृष्णात्रेयेण पूजितः ॥ ३३ ॥ चंदन, तगर, कूठ, मुलहटी, दालचीनी, इलायची, तेजपात, बांसा, मंजीठ, शतावरी, मुनक्का, स्योनापाठा, काली निशोत, मालकांगनी ॥ २३ ॥ कौंचके बीज, मीठी तोरी, अतीश, रास्ना, इंद्रायन, काकोली, क्षीरकाकोली, जीरा, मेदा, महामेदा, पोहकरमूल, नागर- मोथा, नेत्रवाला ॥ २४ ॥ विदारीकंद, शालवण, विधायरा, जमालघोटाकी जड, वायवि- डंग, पद्माक, इंद्रायणविशेष, अमलताश, चीता ॥ २५ ॥ धनियाँ, पांचों तरहके जीरे, तालीशपत्र, खर, तगर, दारुहलदी, कैथ ॥ २६ ॥ नागकेशर, फालसा, छुहारा ये सब समान भाग लेके मर्दित करने पीछे घृत और शहदमैं मिला खावे ॥ २७ ॥ यह लेह भयंकर- रूपी मृगीरोग, उन्माद, कामला, पांडुरोग, हलीमक ॥ २८ ॥ राजरोग, रक्तपित्त, पित्तका अतिसार, शोष, शिरका रोग, सब कालमें रहनेवाला ज्वर ॥ २९ ॥ तमक, श्वास, भ्रम, छर्दि, दाह, मदात्यय, पथरीरोग, प्रमेह, खांसी, श्वासरोग, पीनस ॥ ३० ॥ इनमें प्रयुक्त करना चाहिये । यह सब रोगोंको निवारण करता है, वंध्या स्त्रियोंको और वृद्ध मनुष्योंको विशेष करके हित है ॥ ३१ ॥ और बालकोंको हित है ऐसे यह कल्क बुद्धिमानोंने माना है ॥ ३२ ॥ यह चूर्ण बलको देता है, गुणोंको प्रकाशित करता है। यह चूर्ण अथवा कल्क वृद्ध वैद्यों ने कहा है और कृष्णात्रेयजीने पूजित किया है ॥ ३३ ॥ अथ द्राक्षावलेह । द्राक्षा दारु तथा निशा च मधुकं कृष्णा कलिंगा त्रिवृद्यष्टीका त्रिफला विडंगकटुकासृक्चन्दनं दाडिमम् ॥ चातुर्जातकनिम्ब- का च तुरगी तालीसपत्रं घना मेदे द्वे सुरदारु कुष्ठकमलं रोध्रं समङ्गा वरी ॥ ३४॥ भार्ङ्गीकोलकदाडिमाम्लसहितं काश्मर्य्य- शृङ्गाटकं काम्बोजा शणघण्टिका लघुतरा क्षुद्रा च रास्नायुतम्॥ चूर्ण शर्करया समं मधु घृतं खर्जूरके संयुतं लिह्यात्कर्षमिदं सम- स्तबलकृद्धन्त्याश्वपस्मारकम् ॥ ३५ ॥ उन्मादञ्च सुदारुणं क्षयमथो यक्ष्मा च पाण्डुश्वसन् कासासृग्रुधिरप्रमेहगुदजं स्त्रीणां हितं शस्यते ॥ ३६ ॥ मुनक्का, देवदार, हलदी, मुलहटी, पीपल, सफेद निशोत, काली निशोत, महुवा, हरडैं, बहेडा, आंवला, वायविडंग, कुटकी, रक्तचंदन, अनार, दालचीनी, इलायची, नागकेशर,