हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंथवोदरेषु॥ रक्तेन जातोऽप्ययमेव शोफो गात्रे भवेच्छोफविकार- चारः॥४॥ अन्याश्चोर्ध्वगशोफाश्च श्लेष्मपित्तसमुद्भवाः॥ कष्टसा- ध्याश्च विज्ञेया बहूपद्रवसंयुताः॥५॥ श्लेष्मणि शिरसि प्राप्ते ऊर्ध्व- शोफःप्रजायते॥ मध्यः पक्वाशयस्थेऽपि मलमप्यागते त्वधः॥६॥ रसे सर्वानुगाः शोफाः सर्वदेहानुगा रसाः॥७॥ सर्वाङ्गशोफा अथ मध्यशोफाः सर्वाङ्गशोफाः परिवर्जनीयाः॥ वृद्धे च बाले क्षतजाः क्षयोत्थाश्छर्द्यतिसारश्वसनेन युक्ताः ॥८॥ भ्रमज्वरक्षीणशरी- रजाता शोफोद्भवा या च भवेन्नरस्य ॥ साध्या न वैद्यस्य च दोषदुष्टा सा नैव साध्या भिषजां वरिष्ठ ॥९॥ तोदश्च रूक्षं श्वसनञ्च वातात्पित्ताच्छ्रमः शोफविदाहकश्च॥ शीता घनाः श्लेष्म- णि वाथ कण्डूः स्याद्वन्द्वजा द्वन्द्वजलक्षणेन॥१०॥ अतो वदा- मीत्युपचारमस्यां संस्वेदनं पाचनशोधनं वा॥ विरेचनं रक्तवि- मोक्षणं च कषायशोफेषु विधिः प्रदिष्टः ॥११॥ न चास्य स्ने- हनं कार्य्यं नैव कार्य्यं विरूक्षणम् ॥ १२ ॥ आत्रेयजी कहते हैं--जिनकी इंद्रिय और रोममार्ग विकल हो जावे, बल क्षीण हो जावे तब खट्टा, चर्चरा, गरम ऐसे पदार्थके सेवनेसे शरीरमें शोजा हो जाता है और शीतल पदार्थ, कोमल और झागोंवाले पदार्थके सेवनेसे, रूखा भोजन करनेसे और चोट आदिके लगनेसे, गिरनेसे, मल मूत्र रोकनेसे॥ १॥ आमाशयमें प्राप्त हुआ शोथ वायुविकार मनुष्यके भीतर कुपित हो जाता है तब हाथ पैरोंपै शोजा हो जाता है और दो दोषोंके विकारसे भी यह शोजा होता है॥२॥ मनुष्यके भीतर होनेवाले शोजे और प्रमेहरोगसे उपजी हुई पिडिकाओंके मुखका शोजा साध्य है और सब शरीरमें होनेवाला शोजा, स्त्रीके पैरोंमें तथा पुरुषके मुखमें होनेवाला शोजा असाध्य होता है ॥ ३ ॥ क्षयी रोग, वात, गुल्मका स्थान, राजयक्ष्मा, उदररोग इनमें भी रक्तसे उपजा हुआ यह शोजेका विकार हो जाता है ॥ ४ ॥ अन्य ऊपरको होनेवाले शोजे कफपित्तसे होते हैं व कष्टसाध्य होते हैं और बहुत उपद्रवोंसे युक्त होते हैं॥५॥ जब शिरमें कफ प्राप्त हो जावे तब ऊपरको शोजा हो जाता है और पक्वाशयमें स्थित हुआ मल नीचेको प्राप्त हो जावे तब मध्यमें शोजा होता है ॥ ६ ॥ सब प्रकारके शोजे रसके अनुसार रहते हैं, रस सब शरीरमें प्राप्त होनेवाले हैं ॥ ७ ॥ सब अंगोंमें होनेवाला और मध्यमें होनेवाला दो प्रकारका शोजा होता है वहां सर्वांग- शोथ और वृद्ध, बालक इनका शोजा चोटसे उपजा तथा क्षयरोगमें उपजा और छर्दि, अतिसार