हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअ० २६ ] भाषाटीकासमेता । ( ३७७ ) अथ वातगुल्मपाचन । पथ्या समङ्गा कलशी वृषश्च महौषधं वातिविषा सुराह्वम्॥जले च निष्क्वाथ्य त्विदं हि पानं गुल्मामयानां प्रतिपाचनञ्च॥२१॥ वचायवानीत्रिकटुदशमूलीजलं स्मृतम् ॥ क्वाथश्चोष्णो हितः पाने धान्यनागर्याथवा ॥ २२ ॥ वातगुल्मेषु सर्वेषु ज्वरेषु विषमेषु च॥रास्नाद्यं पञ्चकं वापि वातगुल्मप्रपाचनम् ॥ २३॥ शटी सौवर्चलं शुण्ठी पाचनं वाथ गुल्मिते ॥ २४ ॥ हरडै, मंजीठ, पिठवन, वांसा, सोंठ, अतीश, देवदार इनका जलमें क्वाथ बना उसका पीना गुल्मरोगमें पाचन है ॥ २१ ॥ वच, अजवायन, त्रिकटु, सोंठ, मिर्च, पीपल, दशमूल इनका जलमें क्वाथ बना सुखसे सुहाता हुआ गरम २ पीना हित है अथवा धनियां, सोंठ इनका क्वाथ हित है ॥ २२ ॥ संपूर्ण वातगुल्म और विषमज्वर इनमें ये क्वाथ हित हैं अथवा रास्नाद्यपंचक रास्ना आदि पांच औषधोंका क्वाथ वातगुल्ममें पाचन है ॥ २३ ॥ अथवा कचूर, कालानमक, सोंठ इनका क्वाथ देना पाचन है॥ २४ ॥ अथ पित्तगुल्म तथा कफके गुल्मका पाचन । कटुका विडुला द्राक्षा निम्बपत्राणि चैव तु॥सगुडं पाचनं देयं पैत्तिके गुल्मरोगिणि॥२५॥धात्रीकल्कं सितोपेतं पाचनं पित्त- गुल्मिते॥यवानी चोग्रगन्धा च तथा च कटुकत्रयम् ॥ पाचनं श्लैष्मिके गुल्मे पीतं चोष्णं निशासु च ॥ २६ ॥ सातला, दाख, कुटकी, नींवके पत्ते इन औषधोंके क्वाथमें गुड मिला पित्तके गुल्ममें पाचन देना चाहिये ॥ २५ ॥ और आंवलोंके कल्कमें मिश्री मिला खाना पित्तके गुल्ममें पाचन है और अजवायन, वच, सोंठ, मिर्च, पीपल इनका क्वाथ रात्रिमें पिया हुआ पाचन है ॥ २६ ॥ अथ वातके गुल्ममें जुलाब । नागरा क्रिमिजित्पथ्या त्रिवृतात्रिगुणायुता ॥ चूर्णं गुडान्वितं देयं वातगुल्मविरेचनम् ॥ २७ ॥ दन्ती च भागमेकं च द्वौ भागौ च हरीतकी ॥त्रिवृता भागत्रयं स्याच्छुठ्याश्चत्वार एव च ॥ २८ ॥ प्रक्षिप्य सर्वमेकत्र सर्वतुल्यगुडेन तु ॥ वटकं