भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 413, कुल 548 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 413

अ० २६ ] भाषाटीकासमेता । ( ३८१ ) अथ वातकफके गुल्मकी चिकित्सा । शुण्ठी सौवर्चलं भार्ङ्गी वत्सकं यावशूककम् ॥ जीरे द्वे चाटरूषं च यवानी हिङ्गु सैन्धवम् ॥ ५३ ॥ आरग्वधेन संयुक्तं चूर्ण सघृतमेव च ॥ वातश्लेष्मोद्भवे गुल्मे सुखमाशु प्रपद्यते ॥५४॥ उग्रगन्धा फलत्रिकं देवदारु पुनर्नवा॥ त्रिवृत्सौवर्चलोपेतं क्षा- रोदकसमन्वितम्॥पीतं वातकफे गुल्मे सुखकारि परं मतम् ५५॥ सोंठ, कालानमक, भारंगी, कुड़ाकी छाल, जवाखार, दोनों जीरे, बांसा, अजवायन, हींग, सेंधानमक ॥ ५३ ॥ अमलतास इनके चूर्णमें घृत मिला खानेसे वातकफसे उत्पन्न हुए गुल्ममें शीघ्र ही सुख उत्पन्न होता है ॥ ५४ ॥ वच, त्रिफला, देवदार, सांठी, निशोत, कालानमक इनको जवाखारके जलके संग पीनेसे वातकफसे उपजे हुए गुल्ममें अत्यंत सुख होता है॥५५॥ अथ सन्निपातके गुल्मकी चिकित्सा । ग्रहणीगुल्मक्रिया या वा सा चात्र प्रभवेद्यदि॥शोफोदरेषु सर्वेषु कार्य्यश्चात्र विरेचनम्॥५६॥शोफातिसारसंयुक्तो हन्ति गुल्मो- दरो नरम्॥ तस्य क्षारोदकपानं बृहद्धिङ्ग्वादिचूर्णकम् ॥५७ ॥ अजमोदादिकं वापि शोफातिसारशान्तये॥वमिश्चैवातिसारश्च गुल्मरोगेषु यद्यपि ॥५८॥ तेन साध्यं विजानीयात्प्रत्याख्येया क्रिया हिता ॥ गुडदाडिमपथ्यां च मधुना सहितां पिबेत् ५९ वमिश्च वातिसारं च वारं वारं प्रयोजयेत् ॥ सर्वलक्षणसंयुक्तं गुल्मं तत्सान्निपातिकम् ॥ ६० ॥ तोदोऽर्तिर्विवर्णत्वं मूर्च्छा- तीसारसंयुतम् ॥ वमिः क्लेदश्च तन्द्रा च तदसाध्यं त्रिदो- षजम् ॥ ६१ ॥ संग्रहणी गुल्ममें कही हुई जो क्रिया हों वह यहां करनी चाहिये और सब प्रकारके उदररोगोंमें जुलाब दिवानी चाहिये ॥ ५६ ॥और शोजा, अतीसार इनसे संयुक्त गुल्मोदर मनुष्योंको मार देता है । उसको बृहत् हिंग्वादि चूर्णके संग क्षारोदक पान कराना चाहिये ॥ ५७ ॥ अथवा अजमोदआदिक चूर्णको शोजाकी शांतिके वास्ते देवे, गुल्मोदर रोगोंमें वमन हो और अतीसार हो ॥ ५८ ॥ तो साध्य जानना । उसकी संपूर्ण क्रिया करनी हित कही हैं ओर गुड़, अनारदाना, हरडै, इनको शहदके संग पीवे ॥ ५९ ॥ वमन,अतीसार इनको वारंवार करवावे और जो सब Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu