भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 412

( ३८० ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने- हिङ्गुसौवर्चलाजाजी विश्वा कुष्ठं विडंगकम्॥आरनालेन पीतं च हन्ति गुल्मं सवातिकम् ॥ ४५ ॥ हींग, त्रिफला, दोनों जीरे, चीता, भारंगी, कूठ, वायविडंग, धनियां, पोहकरमूल, सोंठ, देवदार इनके चूर्णमें जवाखार और पांचों नमक मिला खानेसे वातके ॥ ४३ ॥ गुल्मका नाश होता है और मनुष्योंके शूलकी पीड़ाका नाश होता है ॥ ४४ ॥ हींग, कालानमक, जीरा, सोंठ, कूठ, वायविडंग इनको कांजीके संग पीनेसे वातके गुल्मका नाश होता है ॥ ४५ ॥ अथ पित्तगुल्मोदरचिकित्सा । जीरे द्वे त्रिकटु शटी तुम्बुरुः चित्रकं मधु ॥ लेहः पित्तात्मके गुल्मे हितः शोफनिवारणः ॥४६॥ यष्टिकं निम्बपत्राणि तथा धात्रीफलं सिता॥ चूर्णं मध्ववलीढं च पित्तगुल्मनिवारणम्॥४७॥ दोनों जीरे, त्रिकटु अर्थात् सोंठ, मिर्च, पीपल, कचूर, धनियां, चीता, शहद, इनका लेह बना खानेसे पित्तके गुल्मका नाश होता है और शोजा दूर होता है ॥ ४६ ॥ मुलहटी, नींवके पत्ते, आंवले, मिश्री इनके चूर्णको शहदमें मिला चाटनेसे पित्तके गुल्मका नाश होता है ॥ ४७ ॥ त्रिकटुत्रिफलाचित्रवटकफलसंयुतम् ॥ चूर्णं मद्येन वा पीतं फलक्वाथेन वा हितम् ॥४८॥ श्लेष्मगुल्मविनाशाय हितं चैत- त्सुखावहम्॥ ४९ ॥ और सोंठ, मिर्च, पीपल, त्रिफला, चीता, वडके फल, वडवंटे इनके चूर्णको मदिराके संग अथवा त्रिफलाके क्वाथके संग पीवे॥ ४८॥तो कफके गुल्मका नाश होता है और यह हित है सुखको देनेवाला है ॥ ४९ ॥ अथ कफके गुल्मकी चिकित्सा । रोध्रं च कमलं विश्वा कुष्ठं चित्रकमेव च ॥ नागरं हिङ्गुसंयुक्तं चूर्णं मूत्रेण संयुक्तम्॥५०॥श्लेष्मगुल्मविनाशाय शूलोदरविनाश- नम् ॥ उग्रगन्धा च मरिचं क्षारचूर्णसमन्वितम् ॥ ५१ ॥ पि- बेन्मूत्रेण संयुक्तं श्लेष्मगुल्मविनाशनम् ॥ ५२ ॥ लोध, कमल, सोंठ, कूठ, चीता, नागरमोथा, हींग इनके चूर्णको गोमूत्रके संग खावे ॥५०॥ तो कफकी शूल, उदररोग, कफका गुल्म इनका नाश होता है और वच, मिर्चके समान जवाखार- के चूर्णको ॥ ५१ ॥ गोमूत्रके संग पीनेसे कफके गुल्मका नाश होता है ॥ ५२ ॥