भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 483, कुल 548 में से

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पृष्ठ 483

अ० ५१ ] भाषाटीकासमेता । ( ४५१ ) वाश्चैव यथा लाभेन सत्तम ॥ शर्करादधिसंयुक्तं स्त्रीणाञ्चै- वातिसारके ॥ ९ ॥ हरीतकी नागरकं गुडेन वा त्रिफलाकषा- यः॥ शीतः स्त्रीणां विनिहन्ति पाने विबन्धविद्रधींश्च ॥१०॥ मूत्रविबन्धनस्य त्रपुसैर्वारिबीजानि मागधी ॥ शिलाभेदं सिताञ्च पिबेत्तण्डुलवारिणा ॥ मूत्ररोधं गुर्विणीनां वारय- त्याशु निश्चितम् ॥ ११ ॥ आत्रेयजी कहते हैं-थुकथुकी, छर्दि, शोष,शोजा, ज्वर, अरुचि, अतिसार, विवर्ण ये आठ गर्भके उपद्रव हैं ॥ १ ॥ अब योगसे उसकी औषधको कहेंगे । वडके अंकुर,पीपली, खश, नागरमोथाका चूर्ण ॥ २॥ खांडू गोली बनाके मुखमें धारण करनेसे शोषका निवा- रण होता है ॥ ३॥ कूडाकी छाल, पीपली, सूंठ, आंवले, कच्ची वेलगिरीको दहीमें पीस ॥ ४ ॥ खांड मिला पीनेसे स्त्रियोंके गर्भमें सदा सुख होता है ॥ ५ ॥ चिरायतेका कल्क बना बराबरकी खांड मिला पीनेसे गर्भवती स्त्रीकी छर्दिका निवारण होता है, शहदमें मिलाके पीनेसे हृदयकी ग्लानिका नाश होता है ॥ ६ ॥ अदरख मिर्च बिजौराकी केशरसे दांत जिह्वा इनको धोवे और कुल्ले धारण रक्खे ॥ ७ ॥ तो गर्भवती स्त्रियोंकी अरुचिका नाश होता है और कूडाकी छाल, अनारदाना, पाठा, बड़ी सेमफली, वेलगिरी, खरेहटी ॥ ८ ॥ जामन, आंव इनके पत्ते इनमेंसे जितनी औषधें मिलें उनको खांड दहीमें मिलादेनेसे वातसे उपजा स्त्रियोंका अतिसार रोग दूर होता है ॥ ९ ॥ हरड़े, सूंठ इनको त्रिफलाके क्वाथमें मिला और गुड मिला शीतलकर पीनेसे गर्भवती स्त्रीका मलका बंधा, विद्रधी इनका नाश होता है ॥ १० ॥ काकडीके बीज, नेत्रवाला, पीपली, पाषाणभेद, मिश्री, इनको चावलोंके धोवनके जलके संग पीवे तो स्त्रियोंका बंध हुआ मूत्र शीघ्र ही उतारता है॥११॥ मधुकादिकल्क । मधुकविषमृणालं पद्मकिञ्जल्ककल्कं घनमतिविषमैन्द्रं बीज- मौशीरनीरम् ॥ समकृतमथ कल्कं देयमाशु प्रपाने हितमपि युवतीनां गर्भचाले सिताढ्यम् ॥ १२ ॥ मुलहटी, अतीश, कमलकी नाली, कमलकेशर इनका कल्क बना अथवा नागर- मोथा, अतीश, इंद्रजव, खश, नेत्रवाला इनको समान भाग ले कल्क बना शीघ्र ही गर्भवती स्त्रीको पान करावे तथा गर्भवती स्त्रियोंका गर्भ चलित होनेमें मिश्रीसे युक्त इन औषधोंक पान कराना श्रेष्ठ है ॥ १२ ॥

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