भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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अ० ८ ] भाषाटीकासमेता । (५९) काली स्त्री पुष्टिको करती है, वातको नाशती है, उसका दूध अच्छा होता है,सफेद रंगकी स्त्रीका दूध कफको करता है, लाल रंगकी स्त्रीका दूध वातको करता है ॥ १४ ॥ पीलीका दूधः पित्तको शांत करता है और यह अच्छा है ॥ पृथक् पृथक् रंगकी गायोंका दूध । कृष्णासृक्पित्तसंयुक्ता श्वेता श्लेष्मगुणान्विता॥ १५ ॥ कफवा- ताश्रिता पीता रक्ता वातगुणान्विता ॥ यद्यद्द्रव्यगुणास्ते तु ज्ञातव्याः सुमहात्मना ॥ १६ ॥ काली गाय रक्त और पित्तसे संयुक्त होती है, सफेद रंगवाली कफके गुणोंसे संयुक्त होती हैः ॥ १५ ॥ पीली कफ और वातसे संयुक्त होती है, लाल रंगवाली वातके गुणसे संयुक्त होती- है, ऐसे जो जो उत्तम गुण हैं वे सब महात्मा वैद्यको जानने चाहिये ॥ १६ ॥ धारोष्णं शस्यते गव्य धाराशीतन्तु माहिषम् ॥ शृतोष्णमाविकं पथ्यं शृतशीतमजापयः ॥१७ ॥ गायका दूध धारोंसे गर्म हुआ ही हित है,भैंसका दूध धारोंसे पीछे शीतल हुआ हित है,भेडके दूधको गर्म करके पीछे गरम रूप ही पथ्य है,बकरीके दूधको गर्म कर पीछे शीतल करा पथ्य है १७- अथ गायके दूधके गुण । गव्यं पवित्रं च रसायनं च पथ्यं च हृद्यं बलपुष्टिदं स्यात् ॥ आयुष्यप्रदं रक्तविकारपित्तत्रिदोषहद्रोगविषापहं स्यात् ॥ १८ ॥ गायका दूध पवित्र है,रसायन है, पथ्य है, मनोहर है, बलको और पुष्टिको देता है, आयुको देता है, और रक्तविकार, पित्तरोग, त्रिदोष, हृद्रोग और विषको नाशता है ॥ १८ ॥ अथ बकरीके दूधके गुण । छागं कषायं मधुरञ्च शीतं पयो लघु ग्राहि क्षयापहारि ॥ कासज्वराणां रुधिरातिसारे पित्ते त्रिदोषे विहितं हितं वै॥१९॥ बकरीका दूध कसैला है, मधुर है, शीतल है, कब्ज करता है, हलका है, क्षयको नाशता है, खांसीसहित ज्वर, रक्तका अतीसार, पित्त और त्रिदोषमें हित कहा गया है ॥ १९ ॥ अथ भेडके दूधके गुण । औरभ्रं मधुरं रूक्षमुष्णवातकफापहम् ॥ न शस्तं रक्तपित्तानां वातिकानां हितं भवेत् ॥ २० ॥ भेडका दूध मधुर है, रूखा है, उष्ण है, वातको और कफको नाशता है, रक्तपित्तवालोंको अच्छा नहीं है और वातवालोंको अच्छा है ॥ २० ॥