भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 92

( ६० ) हारीतसंहिता । [ प्रथमस्थाने अथ भैंसके दूधके गुण । स्निग्धं मरुच्छीतकरं च तन्द्रानिद्राकरं वृष्यतमं श्रमघ्नम् ॥ बलप्रदं पुष्टिकं कफस्य सञ्जीवनं चास्ति पयो महिष्याः ॥२१॥ भैंसका दूध चिकना है, वायुको और शीतको उपजाता है, तन्द्राको और नींदको करता है, अति पुष्ट है, परिश्रमको नाशता है, बलको देता है, कफको करता है और कफको बढ़ाता है ॥ २१ ॥ अथ ऊँटनीके दूधके गुण । रूक्षं तथोष्णं लवणं कफस्य निवारणं वातविकारहारि ॥ लघु प्रशस्तं कटुकं कृमीणां शोफार्शसामौष्ट्रपयोऽनुकूलम् ॥२२॥ ऊँटनीका दूध गर्म है, सलौना है, रूखा है, कफको दूर करता है, वातके विकारको नाशता है, हलका है, अच्छा है, चर्चरा है, कीड़ोंको निकालता है, शोजाको और बवासीरको शांत करता है ॥ २२ ॥ स्त्रियोंके दूधका गुण । सञ्जीवनं बृंहणमेव सात्म्यं सन्तर्पणं नेत्ररुजापहं च ॥ पित्तस्य रक्तस्य च नाशनं च नारीपयः स्नेहनमेव शस्तम् ॥ २३ ॥ स्त्रियोंका दूध सजीवन है, पुष्टिकारक है, स्वभावसे हित है, तृप्ति करता है, नेत्रोंकी पीडा दूर करता है, दुष्टपित्तका और रक्तका नाश करता है, चिकनाई देता है, ऐसा स्त्रियोंका दूध अच्छा है ॥ २३ ॥ अथ दूधके गुण । निशाशीतांशुसंशीतं निद्रालस्यश्रमानुगम् ॥ सघनं शीतकफकृत्क्षीरं प्राभातिकं भवेत् ॥ २४ ॥ रात्रिके चन्द्रमाकी किरणोंसे शीतल हुआ नींद, आलस्य और परिश्रम करनेवाला है, गाढ़ा है, शीतको और कफको करनेवाला ऐसा प्रभातका दूध होता है ॥ २४ ॥ अथ दिनके दूधके गुण । वासरे सूर्य्यसन्तापात्सद्योष्णं कफवातजित् ॥ दिनमें सूर्यके सन्तापसे तत्काल गर्म हुआ दूध कफ और वातको जीतनेवाला है ॥ अथ रात्रिके दूधके गुण । हितं तत्पित्तशमनं सुशीतं भोजने निशि ॥ २५ ॥ रात्रिमें भोजनके समय अच्छा शीतल किया दूध हित है और पित्तको शांत करता है॥२५॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu