विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
DevanagariHindipublished1,169 पृष्ठ
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( १३ )
| ७८-भगवान् श्रीकृष्णकी समाधि, महान् कोलाहल और उनके पास भागते हुए मृग आदिका आगमन .... ९८७ | ९४-यादव वीरोंद्वारा पौण्ड्रककी सेनाका और एकलव्यद्वारा यादव-सेनाका संहार .... १०२४ |
| ७९-भगवान् श्रीकृष्णके समक्ष दो पिशाचोंका आगमन .... .... ९८९ | ९५-पौण्ड्रकद्वारा पूर्वद्वारके परकोटोंको तोड़नेका प्रयत्न, सात्यकि आदि यादववीरोंका रक्षाके लिये पहुँचना, सात्यकिका वायव्यास्त्रद्वारा पौण्ड्रकसैनिकोंको भगाकर पौण्ड्रकको युद्धके लिये ललकारना और पौण्ड्रककी गर्वोक्ति .... १०२७ |
| ८०-घण्टाकर्ण और भगवान् श्रीकृष्णका एक-दूसरेको अपना परिचय देना तथा घण्टाकर्णद्वारा भगवान् विष्णुका स्तवन एवं समाधि-लाभ .... ९९१ | ९६-पौण्ड्रक और सात्यकिका युद्ध .... .... १०२९ |
| ८१-पिशाचको समाधि-अवस्था में भगवान् विष्णुका साक्षात्कार .... ९९६ | ९७-सात्यकि और पौण्ड्रकका युद्ध ... १०३२ |
| ८२-घण्टाकर्णद्वारा भगवान् विष्णुकी स्तुति .... ९९८ | ९८-बलभद्र और एकलव्यका युद्ध तथा बलभद्रद्वारा निषादोंका संहार ... ... १०३३ |
| ८३-घण्टाकर्णद्वारा भगवान् श्रीकृष्णको उपहार-समर्पण, भगवान्का उसे वर देना और एक मरे हुए ब्राह्मणको जीवित करना .... १००१ | ९९-बलभद्र और एकलव्यका तथा पौण्ड्रक और सात्यकिका युद्ध ... ... १०३५ |
| ८४-श्रीकृष्णका कैलासपर पहुँचकर वहाँ बारह वर्षोंके लिये कठोर तपस्यामें संलग्न होना ... १००४ | १००-श्रीकृष्णका द्वारकामें आगमन और पौण्ड्रकसे उनकी बातचीत ... ... १०३६ |
| ८५-भगवान् श्रीकृष्णके समीप इन्द्र आदि देवताओं तथा उमासहित भगवान् शिवका आगमन .... १००६ | १०१-पौण्ड्रक और श्रीकृष्णका युद्ध तथा पौण्ड्रकका वध .... ... १०३९ |
| ८६-पिशाचों, मुनियों और अप्सराओंके साथ उमा-सहित भगवान् शङ्करका श्रीकृष्णके समीप गमन १००७ | १०२-एकलव्यका द्वीपान्तर-गमन, भगवान् श्रीकृष्णका यादवोंको अपनी यात्राका संक्षिप्त वृत्तान्त बताना तथा अन्तःपुरमें रुक्मिणी और सत्यभामासे मिलकर उन्हें संतोष देना १०४० |
| ८७-भगवान् श्रीकृष्णद्वारा महादेवजीकी स्तुति १००९ | १०३-हंस और डिम्भकके विषयमें जनमेजयका प्रश्न १०४२ |
| ८८-भगवान् शिवद्वारा श्रीविष्णुकी स्तुति .... १०११ | १०४-राजा ब्रह्मदत्तको भगवान् शङ्करकी आराधनासे हंस और डिम्भक नामक पुत्रोंकी प्राप्ति तथा राजसखा विप्रवर मित्रसहको भगवान् विष्णुकी उपासनासे जनार्दन नामक पुत्रका लाभ ... १०४३ |
| ८९-भगवान् शङ्करका ऋषियोंको श्रीकृष्णतत्त्वका उपदेश देना .... ... १०१६ | १०५-हंस और डिम्भककी तपस्या, वरप्राप्ति, जनार्दन-सहित उन दोनोंका विवाह तथा तीनों कुमारोंकी धर्मनिष्ठा ... ... १०४४ |
| ९०-भगवान् शङ्करद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति और श्रीकृष्णका कैलाससे बदरिकाश्रममें लौटना १०१७ | १०६-हंस और डिम्भककी मृगया ... १०४६ |
| ९१-पौण्ड्रकका राजाओंकी सभाओंमें अपनेको शङ्ख, चक्र आदिसे युक्त वासुदेव घोषित करना और श्रीकृष्णको पराजित करनेका मनसूबा बाँधना ... ... १०२० | १०७-सेनासहित हंस और डिम्भकका पुष्कर-तटपर विश्राम, महर्षि कश्यपके वैष्णवसत्रका दर्शन तथा दुर्वासा आदि यतियोंके समुदायमें जाकर उनके प्रति अपनी अश्रद्धाका प्रदर्शन ... १०४७ |
| ९२-पौण्ड्रकके यहाँ नारदजीका आगमन और उसके साथ उनकी बातचीत .... ... १०२१ | |
| ९३-नारदजीका श्रीकृष्णके पास जाना और पौण्ड्रकका द्वारकापर आक्रमण .... १०२३ |