भारतकोश
विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

Harivamsha Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,169 पृष्ठ

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५६-देवताओं और दानवोंका घोर संग्राम— विरोचनका विश्वक्सेनके साथ और कुंजम्भका अंश देवताके साथ युद्ध करते समय घोर पराक्रम प्रकट करना ... ... ९१७

५७-देवासुरसंग्राममें कुजम्भ, असिलोमा और वृत्रासुरके उत्कर्षका वर्णन तथा हरि एवं अश्विनीकुमारकी पराजय ... ... ९२१

५८-रणाजि और एकचक्रके, मृगव्याध और बलासुरके, अजैकपाद् और राहुके तथा सुधूम्राक्ष एवं केशी दैत्यके युद्धका वर्णन ... ९२५

५९-वृषपर्वा और निष्कुम्भ नामक विश्वेदेवके तथा प्रह्लाद और कालके घोर युद्धका वर्णन ... ९३१

६०-कुबेर और अनुह्लादका भयंकर युद्ध ... ९३८

६१-वरुणका विप्रचित्तिके साथ युद्ध और पराजय ... ९४२

६२-अग्निद्वारा दैत्योंकी पराजय तथा बृहस्पतिके द्वारा अग्निदेवका स्तवन ... ... ९४५

६३-राजा बलिके प्रति प्रह्लादका वचन तथा बलिका देवसेनापर आक्रमण ... .... ९४८

६४-बलि और इन्द्रका युद्ध तथा इन्द्रका रणभूमिसे पलायन ... ... ९४९

६५-विजयी बलिके पास राजलक्ष्मी आदिका शुभागमन ... ... ९५१

६६-अदिति और कश्यपजीके साथ देवताओंका ब्रह्मलोकमें जाना .... ... ९५३

६७-ब्रह्माजीकी आज्ञासे कश्यप और अदितिसहित देवताओंका क्षीरसागरके उत्तरतटपर जाकर तपस्यामें संलग्न होना .... .... ९५६

६८-कश्यपद्वारा परमपुरुष परमात्माका स्तवन .... ९५७

६९-कश्यप-अदिति और देवताओंको भगवान् विष्णुका वरदान देना और अदितिके गर्भसे प्रकट होना .... .... ९५९

७०-ऋषियों और विविध देवताओंका वामनजीको नमस्कार करना, गन्धर्वों तथा अप्सराओंका नाचना-गाना, भगवान्‌के वैशिष्ट्यका वर्णन, भगवान्‌का देवताओंसे उनका मनोरथ पूछकर बृहस्पतिजीके साथ बलिके यज्ञमें जाना, वहाँ अपनी वाक्पटुतासे सबको चकित कर देना और राजा बलिका उनसे परिचय तथा आगमन-का प्रयोजन पूछना .... .... ९६१

७१-वामनद्वारा बलिके यज्ञकी प्रशंसा, बलिसे माँगनेके लिये प्रेरित होनेपर वामनका उनसे तीन पग भूमि माँगना, शुक्राचार्य और प्रह्लाद-का बलिको दान देनेसे रोकना, बलिद्वारा दानका समर्थन तथा दान पाते ही वामनका अपने विराट्रूपको प्रकट करना ... ९६५

७२-विराट्रूपधारी वामनपर आक्रमण करनेवाले दैत्योंके नाम, रूप और आयुधोंका परिचय, भगवान्‌का तीनों लोकोंको नापकर राज्यका विभाजन करना, बलिको पातालका राज्य दे मर्यादा बाँधकर उन्हें वहाँ भेजना, जीविकाकी व्यवस्था करना, नारदजीका बलिको मोक्षविंशक स्तोत्रका उपदेश देना, उसके प्रभावसे बलिका बन्धन-मुक्त होना और उस स्तोत्रकी महिमा ९६९

७३-रुक्मिणी देवीकी भगवान् श्रीकृष्णसे पुत्रके लिये प्रार्थना और भगवान्‌का उन्हें आश्वासन देते हुए कैलास जानेका विचार प्रकट करना ९७६

७४-भगवान् श्रीकृष्णका यादवसभामें अपनी कैलास-यात्राका विचार प्रकट करते हुए नगरकी रक्षाके लिये यादवोंको सावधान रहनेका आदेश देना ९७९

७५-भगवान् श्रीकृष्णकी सात्यकि और उद्धवसे नगरकी रक्षाके विषयमें बातचीत तथा बलराम आदि यादवोंको भी रक्षाका भार सौंपकर उनका कैलासयात्राके लिये उद्यत होना .... ९८१

७६-गरुड़पर आरूढ़ होकर श्रीकृष्णका बदरिकाश्रम-में जाना, मार्गमें देवताओं-मुनियोंद्वारा उनकी स्ति .... .... ९८३

७७-देवताओंसहित श्रीकृष्णका बदरिकाश्रममें ऋषियोंद्वारा आतिथ्य-सत्कार .... ९८६