विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
पृष्ठ 52, कुल 1169 में से
संदर्भ में पढ़ेंहरिवंशपर्व ] सप्तमोऽध्यायः २५
शुचिः शुक्रः सहश्चैव नभस्यो नभ एव च ॥ १९ ॥
भानवस्तत्र देवाश्च मन्वन्तरमुदाहृतम् ।
राजन् ! अब मैं तीसरे मन्वन्तरका वर्णन करता हूँ, सुनो। उत्तम नामक मन्वन्तरमें वासिष्ठ नामसे प्रसिद्ध वसिष्ठजीके सात पुत्र (सप्तर्षि) थे। वे पहले हिरण्यगर्भके पुत्र थे। उनके नाम ऊर्ज थे, तथा वे बड़े तेजस्वी थे। इस प्रकार मैंने ऋषियोंका वर्णन कर दिया। महाराज ! अब मैं उत्तम मनुके दस मनोहर पुत्रोंका वर्णन करता हूँ; सुनो— इष, ऊर्ज, तनूज, मधु, माधव, शुचि, शुक्र, सह, नभस्य और नभ (ये दस उत्तम मनुके पुत्र थे) और उस मन्वन्तरमें भानु नामक देवता थे। (इस प्रकार यह तीसरा) मन्वन्तर बताया गया ॥ १६-१९॥
मन्वन्तरं चतुर्थं ते कथयिष्यामि तच्छृणु ॥ २० ॥
काव्यः पृथुस्तथैवाग्निर्जन्मुर्धाता च भारत ।
कपीवानकपीवांश्च तत्र सप्तर्षयोऽपरे ॥ २१ ॥
पुराणे कथितास्तात पुत्राः पौत्राश्च भारत ।
सत्या देवगणाश्चैव तामसस्यान्तरे मनोः ॥ २२ ॥
पुत्रांश्चैव प्रवक्ष्यामि तामसस्य मनोर्नृप ।
द्युतिस्तपस्यः सुतपास्तपोमूलस्तपोधनः ॥ २३ ॥
तपोरतिरकल्माषस्तन्वी धन्वी परंतपः ।
तामसस्य मनोरेते दश पुत्रा महाबलाः ॥ २४ ॥
भारत ! अब मैं चौथे मन्वन्तरका वर्णन करता हूँ, सुनो। तामस नामक मन्वन्तरमें काव्य, पृथु, अग्नि, जन्यु, धाता, कपीवान् और अकपीवान्—ये सात सप्तर्षि थे। तात ! पुराणोंमें इनके बहुत-से पुत्र-पौत्रोंका वर्णन है। तामस मन्वन्तरमें सत्य नामक देवता थे। भारत ! अब मैं तामस मनुके पुत्रोंका वर्णन करता हूँ। राजन् ! तामस मनुके द्युति, तपस्य, सुतपा, तपोमूल, तपोधन, तपोरति, कल्माष, तन्वी, धन्वी और परंतप—ये दस महाबली पुत्र थे ॥ २०-२४॥
वायुप्रोक्ता महाराज पञ्चमं तदनन्तरम् ।
वेदबाहुर्यदुध्रश्च मुनिर्वेदशिरास्तथा ॥ २५ ॥
हिरण्यरोमा पर्जन्य ऊर्ध्वबाहुश्च सोमजः ।
सत्यनेत्रस्तथाऽऽत्रेय एते सप्तर्षयोऽपरे ॥ २६ ॥
देवाश्चाभूतरजसस्तथा प्रकृतयोऽपरे ।
पारिप्लवश्च रैभ्यश्च मनोरन्तरमुच्यते ॥ २७ ॥
अथ पुत्रानिमांस्तस्य निबोध गदतो मम ।
धृतिमानव्ययो युक्तस्तत्त्वदर्शी निरुत्सुकः ॥ २८ ॥
अरण्यश्च प्रकाशश्च निर्मोहः सत्यवाक् कविः ।
रैवतस्य मनोः पुत्राः पञ्चमं चैतदन्तरम् ॥ २९ ॥
इन सबका वायुने वर्णन किया है। महाराज ! अब पाँचवें (रैवत मन्वन्तरका वर्णन करता हूँ।) उस मन्वन्तरमे वेदबाहु, यदुध्र, वेदशिरा मुनि, हिरण्यरोमा, पर्जन्य, सोमपुत्र ऊर्ध्वबाहु और अत्रिपुत्र सत्यनेत्र—ये सात ऋषि थे। उस मन्वन्तरमें भूतरजा, प्रकृति, पारिप्लव और रैभ्य नामक देवगण थे। यह सब (पञ्चम) मन्वन्तरका वर्णन है। अब मैं रैवत मनुके पुत्रोंका वर्णन करता हूँ, सुनो। धृतिमान्, अव्यय, युक्त, तत्त्वदर्शी, निरुत्सुक, अरण्य, प्रकाश, निर्मोह, सत्यवाक् और कवि—ये रैवत मनुके पुत्र हैं। यह पञ्चम मन्वन्तरका वर्णन हुआ ॥ २५-२९ ॥
षष्ठं ते सम्प्रवक्ष्यामि तन्निबोध नराधिप ।
भृगुर्नभो विवस्वांश्च सुधामा विरजास्तथा ॥ ३० ॥
अतिनामा सहिष्णुश्च सप्तैते वै महर्षयः ।
चाक्षुषस्यान्तरे तात मनोर्देवानिमाञ्शृणु ॥ ३१ ॥
आद्याः प्रभूता ऋभवः पृथग्भावा दिवौकसः ।
लेखाश्च नाम राजेन्द्र पञ्च देवगणाः स्मृताः ।
ऋषेराङ्गिरसः पुत्रा महात्मानो महौजसः ॥ ३२ ॥
नड्वलेया महाराज दश पुत्राश्च विश्रुताः ।
ऊरुप्रभृतयो राजन् षष्ठं मन्वन्तरं स्मृतम् ॥ ३३ ॥
नराधिप ! अब मैं छठे (चाक्षुष मन्वन्तर) का वर्णन करता हूँ, सुनो। तात ! चाक्षुष मन्वन्तरमें भृगु, नभ, विवस्वान्, सुधामा, विरजा, अतिनामा और सहिष्णु—ये सात महर्षि थे। राजेन्द्र ! अब (इस मन्वन्तरके) देवताओंका परिचय सुनो। आद्य, प्रभूत, ऋभु, पृथग्भाव और लेखा नामवाले देवताओंके पाँच गण थे, ये स्वर्गमें रहते थे। ये सब अङ्गिरा ऋषिके पुत्र थे और सभी परम तेजस्वी महात्मा थे। इनकी माताका नाम नड्वला था। महाराज ! (चाक्षुष मनुके) ऊरु आदि दस प्रसिद्ध पुत्र थे। राजन् ! यह छठे मन्वन्तरका वर्णन किया गया ॥ ३०-३३ ॥
अत्रिर्वसिष्ठो भगवान् कश्यपश्च महानृषिः ।
गौतमोऽथ भरद्वाजो विश्वामित्रस्तथैव च ॥ ३४ ॥
तथैव पुत्रो भगवानृचीकस्य महात्मनः ।
सप्तमो जमदग्निश्च ऋषयः साम्प्रतं दिवि ॥ ३५ ॥
(अब सप्तम मन्वन्तरका वर्णन करते हैं—) इस वर्तमान समयमें स्वर्गमें स्थित अत्रि, भगवान् वसिष्ठ, महर्षि कश्यप, गौतम, भरद्वाज, विश्वामित्र और सातवें महात्मा ऋचीकके पुत्र भगवान् जमदग्नि—ये सप्तर्षि हैं ॥ ३४-३५ ॥
साध्या रुद्राश्च विश्वे च मरुतो वसवस्तथा ।
आदित्याश्चाश्विनौ चैव देवौ वैवस्वती स्मृतौ ॥ ३६ ॥
मनोर्वैवस्वतस्यैते वर्तन्ते साम्प्रतेऽन्तरे ।
इक्ष्वाकुप्रमुखाश्चैव दश पुत्रा महात्मनः ॥ ३७ ॥
साध्य, रुद्र, विश्वेदेव, मरुत्, वसु, आदित्य और दोनों अश्विनीकुमार, जो कि सूर्यके पुत्र कहलाते हैं,