हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा
पृष्ठ 346, कुल 506 में से
संदर्भ में पढ़ेंषष्ठ उच्छ्वासः उच्चित्योच्चित्य भुवि प्रहितनिगूढात्मदूतनीतानाम्। विजिगीषुरिव कृतान्तः शूराणां संग्रहं कुरुते ॥ १ ॥ विस्रब्धघातदोषः स्ववधाय खलस्य वीरकोपकरः। नवतरुभङ्गध्वनिरिव हरिनिद्रातरकरः करिणः ॥ २ ॥ अथ प्रथमप्रेतपिण्डभुजि भुक्ते द्विजन्मनि, गतेषूद्वेजनीयेष्वशौचदि- वसेषु, चक्षुर्दाहदायिनि दीयमाने द्विजेभ्यः शयनासनचामरातपत्रामत्रपत्र- शस्त्रादिके नृपनिकटोपकरणकलापे, नीतेषु तीर्थस्थानानि सह जनहृदयैः उच्चित्येति । कृतान्तोऽन्तकः शूराणां संग्रहं कुरुते । किं कृत्वा । उच्चित्योच्चित्य यथाप्रधानं प्रहितनिगूढाः स्वभावप्रच्छन्ना यमदूता यमकिंकरास्तैर्नीतानां विजिगीषु- र्यथान्विष्यान्विष्यामदूर्तानां शूराणां संग्रहं कुरुते । अनेनोच्छ्वासातः संगृहीतः। तथा हि कृतोऽन्तो विनाशो येन स शशाङ्कनामा गौडाधिपतिः । शूराणां राज्यवर्धनानु- चराणां प्रधानराजपुत्राणां तत्सहितानां संग्रहमकरोत् । कथम् ? उच्चित्योच्चिया- न्विष्यान्विष्य । कीदृशानाम् ? प्रहितनिगूढात्मदूतानाम । तथा हि तेन शशाङ्केन विश्वासार्थं दूतमूखेन कन्याप्रदानमुक्त्वा प्रलोभितो राज्यवर्धनः स्वगेहे सानुचरो भुञ्जान एव छद्मना व्यापादितः ॥ १ ॥ अत एव चाह-विस्रब्धेत्यादि । खलोऽत्र गौडापसदः । निद्राद्यस्तरकरः शशाङ्कः । वीरश्च हर्षः ॥ २ ॥ अथ प्रथमेत्यादौ । अस्मिन्नस्मिन्सति देवो हर्षो मौलेन महाजनेनात्मानं सकलं विजय की इच्छा रखने वाले राजा के समान यमराज पृथिवी में जगह-जगह पर भेजे हुए अपने गुप्तचर दूतों द्वारा चुन-चुन कर लाए गए शूर वीरों का संग्रह करता है॥१॥ जिस प्रकार हाथी द्वारा तोड़े गए वृक्ष के टूटने की ध्वनि सिंह को नींद से उठा देती है और वह हाथी को मार डालता है उसी प्रकार खल स्वभाव के गौड़राज द्वारा विश्वास- घात करके ( राज्यवर्धन के ) मारे जाने के अपराध ने वीर (हर्ष) को कुपित कर दिया और हर्ष ने उसे मार डाला ॥ २ ॥ प्रेतपिंड खाने वाले महाब्राह्मणों ने भोजन किया । उद्वेग से भरे हुए अशौच के दिन बीत गए । आँखों में शूल की तरह चुभती हुई राजा के निजी उपयोग की सामग्री- पलंग, पीढ़ा, चँवर, छत्र, बर्त्तन, सवारी, हथियार आदि ब्राह्मणों को समर्पित कर दी गई। जनता के हृदय के साथ राजा की अस्थियाँ तीर्थस्थानों में भेज दी गईं । चिता के स्थान