हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३४४ हर्षचरितम् ग्राहिणी यमतां ययौ यवनेश्वरस्य । लोभबहुलं च बहुलनिशि निधानमु- त्खनन्तमुत्खातखङ्गप्रमाथिनी ममन्थ माथुरं बृहद्रथं विदूरथवरूथिनी । नागवनविहारशीलं च मायामातङ्गाङ्गान्निर्गता महासेनसैनिका वत्सपतिं न्ययंसिषुः । अतिदयितलास्यस्य च शैलूषमध्यमध्यास्य मूर्धानमसिलतया मृणालमिवालुनादग्निमित्रात्मजस्य सुमित्रस्य मित्रदेवः । प्रियतन्त्रीवाद्य- स्यालाबुवीणाभ्यन्तरसुषिरनिहितनिशिततरवारयो गान्धर्वच्छलात्तच्छद्मानः कार्यों भृत्य इत्युक्तम् । यवनेश्वरः केनचिच्छत्रुणासाद्य व्यापादितुमिष्टः । स्वसुहृदा शत्रुप्रहितलेखेन बोधितः । लेखपृष्ठे च तेन लिखितम् 'स्वयं वाचयितव्यो लेख' इति । ततो यवनेश्वरस्य स्वयं वाचयतश्चूडामणिप्रतिबिम्बितान्यक्षराणि वाचयित्वा तत्प्रहिता चामरग्राहिणी प्रभवे निवेद्य तदाज्ञया तं जघानेति । अनेन सूक्ष्मोऽपि रहस्यभेदहेतू रक्षणीय इत्युक्तम् । विदूरथप्रयुक्तेन नरेन्द्रवृन्दप्रतारितो बृहद्रथो नाम राजा लोभवशात्खन्यवादे कृष्णनिशि प्रवृत्तस्तत्सेनया प्रहत इति । अतः प्रवर्तितव्यमित्युक्तम् । महासेनो नामोज्जयिनीपतिः स्वदुहितरं वासवदत्ता- ख्यामुदयनाय दित्सुः कपटजं नागं वीध्यां प्रसह्य छद्मप्रहितैः शरैर्नामगुणान्प्रख्या- श्रुतवर्मा का राज्य भी सुग्गे के द्वारा रहस्य की बात जान लेने पर हाथ से चला गया । मृत्तिकावती के राजा सुवर्णचूड़ का निद्रा की अवस्था में बड़बड़ाने से हुआ मंत्रभेद ही उसकी मृत्यु का कारण बना । शत्रु के द्वारा रहस्य जानने के लिए भेजी हुई चामरग्राहिणी बाचते समय चूड़ामणि में प्रतिबिम्बित मित्र का गुप्त लेख पढ़कर यम के रूप में यवनेश्वर की हत्या का कारण बन गई । राजाओं के बहकाने पर अँधेरी रात में जमीन से रत्न का खजाना उखाड़ते हुए अत्यन्त लोभी मथुरा के राजा बृहद्रथ को विदूरथ की सेना ने तलवार खींच कर मार डाला । उज्जयिनी के राजा महासेन के मायाहस्ती के शरीर में छिपे हुए सैनिकों ने वत्सराज को नागबन में बिहार के लिए छल से ले जाकर मार डाला । मित्रदेव ने नट का भेस बनाकर नृत्य के शौकीन अग्निमित्र के पुत्र सुमित्र का सिर मृणाल के समान कतर दिया । शत्रु के पुरुषों ने संगीत सीखने के बहाने कपट से शिष्य का भेस बनाकर संगीत के प्रेमी अश्मक के राजा शरभ का सिर वीणा के भीतर छिपाकर रखी हुई तलवारों से काट डाला । अनार्य सेनापति पुष्पमित्र ने सेना को देखने के बहाने सारे सैनिकों को मिलाकर प्रजा में दुर्बल अपने स्वामी मौर्य राजा बृहद्रथ को समाप्त कर डाला । नये आविष्कारों में कुतूहल रखने वाला चण्डीपति युद्ध में हारे यवनों के द्वारा निर्मित आकाश में उड़ने वाले यंत्रयान से जाने कहाँ पहुँचा दिया गया । अचरज की बातों में कुतूहल दिखाने वाला शिशु नागपुत्र काकवर्ण युद्ध में जीतकर आए हुए यवन से निर्मित