भारतकोश
हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished506 पृष्ठ

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( २ ) मालती का प्रस्थान, सरस्वती की उत्कण्ठा ५८ दधीच का आगमन और सरस्वती के साथ रहना ६० पुत्रोत्पत्ति के बाद सरस्वती का गमन ६१ सारस्वत और वत्स में स्नेह ६२ वात्स्यायन वंश के ब्राह्मण ६३ बाण के पूर्वज ६५ बाण और उसके साथी ६६ घुमक्कड़ बाण का अपने गांव लौटना ६९ द्वितीय उच्छ्वास (राजदर्शन) बाण द्वारा अपने गांव के घर में घूमना ७१ ग्रीष्म-समय-वर्णन ७३ कृष्ण के दूत मेखलक का आगमन और उसके द्वारा कृष्ण का संदेश सुनाना ७३ बाण का एकान्त में विचार करके निर्णय करना ८० बाण का तैयार होकर प्रीतिकूट से निकल पड़ना ९० मल्लेकूट और वनग्रामक पार करके राजद्वार पर पहुँचना, और राजद्वार का वर्णन ९२ प्रतीहार पारियात्र का वर्णन ९९ मन्दुरा और इभधिष्ण्यागार-वर्णन १०० दर्पशात हाथी का वर्णन १०४ सम्राट् हर्ष का वर्णन ११२ बाण की हर्ष से भेंट १२८ बाण और हर्ष की तीखी बातचीत और मेल १२९ तृतीय उच्छ्वास (राजवंशवर्णन) शरत्काल-वर्णन १३५ बाण का दरबार से अपने गांव लौटना १३७ गांव के भाई-बन्धुओं से परस्पर वार्तालाप १३८ पुस्तकवाचक सुदृष्टि द्वारा वायुपुराण का पाठ १४० बाण के भाइयों की हर्षचरित सुनाने के लिए उससे प्रार्थना १४२ दूसरे दिन बाण द्वारा हर्षचरित का आरम्भ १४३ श्रीकंठजनपद-वर्णन १५३

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