हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३ ) स्थाण्वीश्वर-वर्णन १५७ पुष्पभूति का वर्णन १६२ भैरवाचार्य का शिष्य १६६ भैरवाचार्य का वर्णन १६९ पुष्पभूति को भैरवाचार्य का कृपाण देना १७६ भैरवाचार्य की साधना १८२ पुष्पभूति का श्रीकंठनाग को परास्त करना १८५ लक्ष्मी का प्रसन्न होकर प्रकट होना और पुष्पभूति को वर देना १८७ भैरवाचार्य का विद्याधर-योनि को प्राप्त होना १९१ चतुर्थ उच्छ्वास ( चक्रवर्तिजन्मवर्णन ) पुष्पभूति के वंश में प्रभाकरवर्धन १९७ यशोमतीवर्णन १९९ यशोमती का स्वप्न देखना २०३ यशोमती के गर्भ से राज्यवर्धन की उत्पत्ति २०७ हर्ष की उत्पत्ति २०९ पुत्रजन्मोत्सव-वर्णन २१३ राज्यश्री का जन्म २२३ हर्ष का ममेरा भाई भण्डि २२४ मालवराज पुत्र कुमारगुप्त और माधवगुप्त २२९ राज्यश्री के विवाह की चिन्ता २३४ विवाह की तैयारियां २३६ ग्रहवर्मा का बरात लेकर आना २४३ ग्रहवर्मा द्वारा वधूमुखदर्शन २४५ विवाह और वासगृह में वर-वधू का आना २४७ पञ्चम उच्छ्वास ( महाराज-मरण-वर्णन ) युद्ध के लिए राज्यवर्धन का प्रयाण २५० हर्ष का बीच में ही मृगया के लिए रुक जाना २५१ दुःस्वप्न-दर्शन ,, दीर्घाध्वग कुरंगक का आगमन २५३ पिताजी की बीमारी का समाचार सुनकर हर्ष का लौटना २५४ शोकाकुल स्कन्धावार २५५