भारतकोश
हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished506 पृष्ठ

पृष्ठ 44, कुल 506 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 44

राजकुल में प्रवेश २५८ धवलगृह में प्रभाकरवर्धन की परिचर्या २५९ रुग्णावस्था में प्रभाकरवर्धन का वर्णन २६२ प्रभाकरवर्धन का पुत्र-प्रेम २६६ रसायन का पावक-प्रवेश २७१ राजभवन में अशुभ-सूचक महोत्पात २७३ बेलाप्रतीहारी का पहुँचकर हर्ष को यशोमती के सती होने की तैयारी की सूचना देना २७५ यशोमती सतीवेश में २७८ यशोमती के अन्तिम वाक्य २८१ हर्ष को प्रभाकरवर्धन की सान्त्वना २८६ प्रभाकरवर्धन की मृत्यु २८८ राजा की और्ध्वदैहिक क्रिया २९० हर्ष की चिन्ता २९० राजा की चिन्ता में भृत्य, मित्र, सचिवों का गृह-त्याग २९४ हर्ष को राज्यवर्धन की चिन्ता २९७ षष्ठ उच्छ्वास ( राजप्रतिज्ञावर्णन ) राज्यवर्धन का लौटना ३०२ राज्यवर्धन का हर्ष को समझाना और निर्वेद की बात करना ३०६ हर्ष का चिन्ता करना ३१० मालवराज द्वारा गृहवर्मा की मृत्यु और राज्यश्री को कारावास दिए जाने का समाचार ३१४ राज्यवर्धन का क्रोध करना और युद्ध के लिए प्रस्थान करना ३१४ हर्ष का दुःस्वप्न देखना ३१९ राज्यवर्धन के वध का समाचार ३२१ राज्यवर्धन का प्रचंड क्रोध ३२२ सेनापति सिंहनाद ३२५ सिंहनाद का उपदेश ३२७ हर्ष की दिग्विजयप्रतिज्ञा ३३५ हर्ष का प्रदोषस्थान और शयनगृह में जाना ३३७ गजसेना के अध्यक्ष स्कन्दगुप्त ३३९ स्कन्दगुप्त का राजाओं के छल-कपट का वर्णन करना ३४२ अपशकुन-वर्णन ३४८