भारतकोश
हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished506 पृष्ठ

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( २ ) सप्तम उच्छ्वास ( छत्रलब्धि ) दण्डयात्रालग्न का निश्चय, ब्राह्मणों को दान देना ३५० छावनी में सैनिकप्रयाण की कलकल ३५३ सैनिक-प्रयाण से जनता को कष्ट ३६५ हर्ष द्वारा सेना का निरीक्षण ३७१ हंसवेग का आगमन ३७३ छत्र की विशेषता ३७४ छत्रवर्णन ३७५ भास्करवर्मा के भेजे हुए अन्य उपहार ३७७ हंसवेग द्वारा संदेश-कथन ३८२ सरकारी नौकरों पर फबतियाँ ३८६ भण्डि का आगमन ३९३ राज्यश्री का समाचार ३९५ राज्यश्री की खोज में हर्ष का प्रयाण और विन्ध्याटवी के समीप आ जाना ३९७ विन्ध्याटवी-वर्णन ३९७ अष्टम उच्छ्वास ( विन्ध्याद्रिनिवेशन ) हर्ष का विन्ध्याटवी में प्रवेश और आटविक सामन्त शरभकेतु ४०४ शबरयुवक निर्घात का वर्णन ४०४ निर्घात की हर्ष से बातें ४०७ विभिन्न वृक्षों का वर्णन ४०९ दिवाकरमित्र का वर्णन ४१३ दिवाकरमित्र द्वारा हर्ष का सत्कार ४१७ हर्ष द्वारा आगमन-प्रयोजन का निवेदन ४२१ एक भिक्षु द्वारा राज्यश्री की दशा का वर्णन ४२२ हर्ष का राज्यश्री के समीप जाना ४३१ स्त्रियों के आलाप " हर्ष का राज्यश्री से मिलन ४३५ दिवाकरमित्र द्वारा हर्ष को एकावली की भेंट ४३९ राज्यश्री को दिवाकरमित्र का उपदेश ४४४ राज्यश्री को हर्ष द्वारा सौंपना ४४९ सूर्यास्त-चन्द्रोदय-वर्णन ४५१