हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१४ हर्षचरितम् बसन्तिके, अन्तरं प्रयच्छ । आपृच्छते छत्रधारी देवि, देहि दृष्टिम् । इष्टा तव जहाति जीवितं विजयसेना । सेयं मुक्तिका मुक्तकण्ठमारटति निकटे नाटकसूत्रधारी । पादयोः पतति ते ताम्बूलवाहिनी बहुमता राजपुत्रि, पत्रलता, कलिङ्गसेने, अयं पश्चिमः परिष्वङ्गः । पीडय निर्भरमुरसा माम् । असवः प्रवसन्ति वसन्तसेने । मञ्जुलिके, मार्जयसि कतिकृत्वः सुदुःसह- दुःखसहस्रास्रदिग्धं चक्षुरिदं रोदिषि कियदालिष्य च माम् । निर्माणमी- दृशं प्रायशो यशोधने । धीरयस्यद्यापि किं मां माधविके । केयमवस्था संस्थापनानाम् । गतः कालः कालिन्दि, सखीजनानुनयाञ्जलीनाम् । उन्म- त्तिके मत्तपालिके, कृताः पृष्ठतः प्रणयिनीप्रणिपातानुरोधाः । शिथिलय चकोरवति, चरणग्रहणं प्रहिणि । कमलिनि, किमनेन पुनःपुनर्देवोपालम्भेन । न प्राप्तं चिरं सखीजनसंगमसुखम् । आर्ये महत्तरिके तरङ्गसेने, नम- स्कारः । सखि सौदामिनि, दृष्टासि । समुपनय हव्यवाहनार्चनकुसुमानि कुमुदिके । देहि चितारोहणाय रोहिणि, हस्तावलम्बनम् । अम्ब, धात्रि, धीरा भव । भवन्त्येवंविधा एव कर्मणां विपाकाः पापकारिणीनाम् । आर्य- संस्थापनानां सांत्वनानाम् । ग्रहोऽभिनिवेशः । विदा के रही है, दृष्टि डालिए । आपकी प्रिय सखी विजयसेना प्राण त्याग कर रही है । नाटक की सूत्रधारी यह मुक्तिका आपके निकट गला फाड़कर चिल्ला रही है। हे राजपुत्री, आपकी अच्छी ताम्बूलवाहिनी पत्रलता चरणों पर गिर रही है । अरी कलिङ्गसेना, यह अन्तिम आलिङ्गन है। कसकर मुझे छाती से दबा। अरी बसन्तसेने, अब प्राण जा रहे हैं। अरी मंजुलिका, दुःसह दुःखों के उत्पन्न आँसू से नेत्र को कितनी बार साफ करेगी और कितनी बार मुझे अँकवार कर रोयेगी ? अरी यशोधना, विधि का यही विधान है । अरी माधविका, आज भी क्यों मुझे धीरज बँधाती है ? सान्त्वना देने की अवस्था अब कहाँ ? अरी कालिन्दी, सखियों के अनुनय की अञ्जलि का अवसर चला गया । अरी पागल मत्तपालिका, प्रिय सखियों के प्रणिपात के अनुरोध पीछे कर दिए गए । अरी ढीठ चकोरवती, मेरे पैर छोड़ । अरी कमलिनी, बार-बार दैव को कोसने से क्या काम ? सखियों का संगमसुख देर तक प्राप्त नहीं हो सका । आर्या, महत्तरिका, तरंगसेना, यह मेरा नमस्कार है । सखी सौदामिनी, तुझे देख लिया । अरी कुमुदिका, अग्निदेव की पूजा के फूल ला। अरी रोहिणी, चिता पर चढ़ने के लिए हाथ का सहारा दे । अम्ब धात्री, धीरज धरो। पापिनियों के कर्मों के विपाक ऐसे ही होते हैं । आर्यचरणों के लिए