हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Harshacharitam of Mahakavi Banabhatta with Sanket and Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १६ ) सरस्वती-मालती की रहःसंकथा ६० मालती का प्रस्थान, सरस्वती की उत्कण्ठा ६४ दधीच का आगमन और सरस्वती के साथ रहना ६६ पुत्रोत्पत्ति के बाद सरस्वती का गमन ६७ सारस्वत और वत्स में स्नेह ६७ वात्स्यायन वंश के ब्राह्मण ६९ बाण के पूर्वज ७२ बाण और उसके साथी ७३ घुमक्कड़ बाण का अपने गाँव लौटना ७६ द्वितीय उच्छ्वास ( राजदर्शन ) बाण द्वारा अपने गाँव के घर में घूमना ७८ ग्रीष्म-समय-वर्णन ७९ कृष्ण के दूत मेखलक का आगमन और उसके द्वारा कृष्ण का सन्देश सुनाना ८९ बाण का एकान्त में विचार करके निर्णय करना ९५ बाण का तैयार होकर प्रीतिकूट से निकल पड़ना ९६ मल्लकूट और वनग्रामक पार करके राजद्वार पर पहुँचना और राजद्वार का वर्णन ९७ प्रतीहार पारियात्र का वर्णन १०५ मन्दुश और इमधिष्ण्यागार-वर्णन १०७ दर्पशात हाथी का वर्णन ११० सम्राट् हर्ष का वर्णन ११८ बाण की हर्ष से भेंट १३४ बाण और हर्ष की तीखी बातचीत और मेल १३५ तृतीय उच्छ्वास ( राजवंशवर्णन ) शरत्काल-वर्णन १४१ बाण का दरबार से अपने गाँव लौटना १४३ गाँव के भाई-बन्धुओं से परस्पर वार्तालाप १४४ पुस्तकवाचक सुदृष्टि द्वारा वायुपुराण का पाठ १४६ बाण के भाइयों की हर्षचरित सुनाने के लिए उससे प्रार्थना १४९ दूसरे दिन बाण द्वारा हर्षचरित का आरम्भ १५१ श्रीकण्ठजनपद-वर्णन १५१