भारतकोश
हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)

Harshacharitam of Mahakavi Banabhatta with Sanket and Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट द्वारा

DevanagariHindipublished184 पृष्ठ

पृष्ठ 39, कुल 184 में से

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( ३७ ) स्थाण्वीश्वर-वर्णन १६४ पुष्पभूति का वर्णन १६९ भैरवाचार्य का शिष्य १७२ भैरवाचार्य का वर्णन १७५ पुष्पभूति का भैरवाचार्य का कृपाण देना १८२ भैरवाचार्य की साधना १८८ पुष्पभूति का श्रीकंठनाग को परास्त करना १९२ लक्ष्मी का प्रसन्न होकर प्रकट होना और पुष्पभूति को वर देना १९४ भैरवाचार्य का विद्याधर-योनि को प्राप्त होना १९७ चतुर्थ उच्छ्वास ( चक्रवर्तिजन्मवर्णन ) पुष्पभूति के वंश में प्रभाकरवर्धन २०३ यशोमतीवर्णन २०५ यशोमती का स्वप्न देखना २०९ यशोमती के गर्भ से राज्यवर्धन की उत्पत्ति २१४ हर्ष की उत्पत्ति २१७ पुत्रजन्मोत्सव-वर्णन २१९ राज्यश्री का जन्म २२९ हर्ष का ममेरा भाई भण्डि २३० मालवराज पुत्र कुमारगुप्त और माधवगुप्त २३६ राज्यश्री के विवाह की चिन्ता २४० विवाह की तैयारियां २४२ ग्रहवर्मा का बरात लेकर आना २४८ ग्रहवर्मा द्वारा वधूमूखदर्शन २५१ विवाह और वासगृह में वर-वधू का आना २५४ पञ्चम उच्छ्वास ( महाराज-मरण-वर्णन ) युद्ध के लिए राज्यवर्धन का प्रयाण २५७ हर्ष का बीच में ही मृगया के लिए रुक जाना २५८ दुःस्वप्न-दर्शन २५८ दीर्घाध्वग कुरंगक का आगमन २५९ पिताजी की बीमारी का समाचार सुनकर हर्ष का लौटना २६० शोकाकुल स्कन्धावार २६२ राजकुल में प्रवेश २६४

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