हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Harshacharitam of Mahakavi Banabhatta with Sanket and Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंधवलगृह में प्रभाकरवर्धन की परिचर्या २६६ रुग्णावस्था में प्रभाकरवर्धन का वर्णन २६९ प्रभाकरवर्धन का पुत्र-प्रेम २७२ रसायन का पावक-प्रवेश २७८ राजभवन में अशुभ-सूचक महोत्पात २८० वेलाप्रतीहारी का पहुँचकर हर्ष को यशोमती के सती होने की तैयारी की सूचना देना २८३ यशोमती सतीवेश में २८५ यशोमती के अन्तिम वाक्य २८९ हर्ष को प्रभाकरवर्धन की सान्त्वना २९३ प्रभाकरवर्धन की मृत्यु २९५ राजा की और्ध्वदेहिक क्रिया २९६ हर्ष की चिन्ता २९७ राजा की चिन्ता में भृत्य, मित्र, सचिवों का गृह-त्याग ३०१ हर्ष को राज्यवर्धन की चिन्ता ३०४ षष्ठ उच्छ्वास ( राजप्रतिज्ञावर्णन ) राज्यवर्धन का लौटना ३०८ राज्यवर्धन का हर्ष को समझाना और निर्वेद की बात करना ३१४ हर्ष का चिन्ता करना ३१८ मालवराज द्वारा ग्रहवर्मा की मृत्यु और राज्यश्री को कारावास दिए जाने का समाचार ३२१ राज्यवर्धन का क्रोध करना और युद्ध के लिए प्रस्थान करना ३२२ हर्ष का दुःस्वप्न देखना ३२७ राज्यवर्धन के वध का समाचार ३२९ हर्ष का प्रचण्ड क्रोध ३३० सेनापति सिंहनाद ३३३ सिंहनाद का उपदेश ३३५ हर्ष की दिग्विजयप्रतिज्ञा ३४२ हर्ष का प्रदोपस्थान और शयनगृह में जाना ३४५ गजसेना के अध्यक्ष स्कन्दगुप्त ३४७ स्कन्दगुप्त का राजाओं के छल-कपट का वर्णन करना ३५० अपशकुन-वर्णन ३५५