हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संकेत एवं जगन्नाथ पाठक सान्वय हिन्दी व्याख्या सटीक)
Harshacharitam of Mahakavi Banabhatta with Sanket and Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ३९ ) सप्तम उच्छ्वास ( छत्रलब्धि ) दण्डयात्रालग्न का निश्चय, ब्राह्मणों को दान देना ३५९ छावनी में सैनिकप्रयाण की कलकल ३६२ सैनिक-प्रयाण से जनता को कष्ट ३७२ हर्ष द्वारा सेना का निरीक्षण ३८० हंसवेग का आगमन ३८२ छत्र की विशेषता ३८३ छत्रवर्णन ३८४ भास्करवर्मा के भेजे हुए अन्य उपहार ३८६ हंसवेग द्वारा संदेश-कथन ३९१ सरकारी नौकरों पर फवतियाँ ३९५ भण्डि का आगमन ४०२ राज्यश्री का समाचार ४०४ राज्यश्री की खोज में हर्ष का प्रयाण और विन्ध्याटवी के समीप आ जाना ४०६ विन्ध्याटवी वर्णन ४०६ अष्टम उच्छ्वास ( विन्ध्याद्रिनिवेशन ) हर्ष का विन्ध्याटवी में प्रवेश और आटविक सामन्त शरभकेतु ४१३ शबरयुवक निर्घात का वर्णन ४१३ निर्घात की हर्ष से बातें ४१७ विभिन्न वृक्षों का वर्णन ४१८ दिवाकरमित्र का वर्णन ४२२ दिवाकरमित्र द्वारा हर्ष का सत्कार ४२६ हर्ष द्वारा आगमन-प्रयोजन का निवेदन ४२९ एक भिक्षु द्वारा राज्यश्री की दशा का वर्णन ४३० हर्ष का राज्यश्री के समीप जाना ४४० स्त्रियों के आलाप ४४० हर्ष का राज्यश्री से मिलन ४४४ दिवाकर द्वारा हर्ष को एकावली की भेंट ४४८ राज्यश्री को दिवाकरमित्र का उपदेश ४५३ राज्यश्री को हर्ष द्वारा सौपना ४५८ सूर्यास्त-चन्द्रोदय-वर्णन ४६० परिशिष्ट : बाण-प्रशस्ति ४६३