भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

हिन्द स्वराज अब चोर को घर से निकालने की मिसाल लें। मैं आपसे इसमें सहमत नहीं हूँ कि चोर को निकालने के लिए चाहे जो साधन काम में लिया जा सकता है। अगर मेरे घर में मेरा पिता चोरी करने आएगा, तो मैं एक साधन काम में लूँगा। अगर कोई मेरी पहचान को चोरी करने आएगा, तो मैं यही अंग्रेजों ने मार-काट साधन काम में नहीं लूँगा और कोई अनजान आदमी करके १८३३ में वोट आएगा, तो मैं तीसरा साधन काम में लूँगा। अगर के विशेष अधिकार वह गोरा हो तो एक साधन और हिन्दुस्तानी हो तो पाए। क्या मार-काट दूसरा साधन काम में लाना चाहिए, ऐसा भी शायद करके वे अपना फ़र्ज़ आप कहेंगे। अगर कोई मुर्दार लड़का चोरी करने समझ सके ? उनकी आया होगा, तो मैं बिल्कुल दूसरा ही साधन काम मुराद अधिकार पाने में लूँगा। की थी, इसलिए अगर वह मेरी बराबरी का होगा, तो और ही कोई उन्होंने मार-काट साधन मैं काम में लूँगा और अगर वह हथियारबंद मचाकर अधिकार पा तगड़ा आदमी होगा, तो मैं चुपचाप सो रहूँगा। इसमें लिये। सच्चे पिता से लेकर ताकतवर आदमी तक अलग-अलग अधिकार तो फ़र्ज़ के साधन इस्तेमाल किये जाएँगे। पिता होगा तो भी मुझे फल हैं, वे अधिकार लगता है कि मैं सो रहूँगा और हथियार से लैस कोई उन्होंने नहीं पाये। होगा तो भी मैं सो रहूँगा। पिता में भी बल है, नतीजा यह हुआ कि हथियारबंद आदमी में भी बल है। दोनों बलों के बस सबने अधिकार पाने होकर मैं अपनी चीज को जाने दूँगा। का प्रयत्न किया, पिता का बल मुझे दया से रुलाएगा। हथियारबंद लेकिन फ़र्ज़ सो आदमी का बल मेरे मन में गुस्सा पैदा करेगा, हम गया। कट्टर दुश्मन हो जाएँगे। ऐसी मुश्किल हालत है। इन मिसालों से हम दोनों साधनों के निर्णय पर तो नहीं पहुँच सकेंगे। मुझे तो सब चोरों के बारे में क्या करना चाहिए यह सूझता है, लेकिन उस इलाज से आप घबरा जाएँगे, इसलिए मैं आपके सामने उसे नहीं रखता। आप इसे समझ लें और अगर नहीं समझेंगे तो हर वक्त आपको अलग साधन काम में लेने होंगे, लेकिन आपने इतना तो देखा कि चोर को निकालने के लिए चाहे जो साधन काम नहीं देगा और जैसा साधन आपका होगा उसके मुताबिक नतीजा आयेगा। 106