भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 110

हिन्द स्वराज्य तो अर्जी निकम्मी चीज है। बराबरी का आदमी अर्जी करेगा तो वह उसकी नम्रता की निशानी मानी जाएगी। गुलाम अर्जी करेगा तो वह उसकी गुलामी की निशानी होगी। जिस अर्जी के पीछे बल है वह बराबरी के आदमी की अर्जी है और वह अपनी माँग अर्जी के रूप में रखता है, यह उसकी खानदानियत को बताता है। अर्जी के पीछे दो तरह के बल होते हैं, "अगर आप नहीं देंगे तो हम आपको मारेंगे।" यह गोला-बारूद का बल है। इसका बुरा नतीजा हम देख चुके। दूसरा बल यह है: "अगर आप नहीं देंगे तो हम आपके अर्जदार नहीं रहेंगे। हम अर्जदार होंगे तो आप बादशाह बने रहेंगे। हम आपके साथ कोई व्यवहार नहीं रखेंगे।" इस बल को चाहे दयाबल कहें, चाहे आत्मबल कहें या सत्याग्रह कहें। यह बल अविनाशी है और इस बल का उपयोग करने वाला अपनी हालत को बराबर समझता है। इसका समावेश हमारे बुजुर्गों ने 'एक नहीं सब रोगों की दवा' में किया है। यह बल जिसमें है उसका हथियार बल कुछ नहीं बिगाड़ सकता। बच्चा अगर आग में पैर रखे, तो उसको दबाने की मिसाल की छानबीन करने में तो आप हार जाएँगे। बच्चों के साथ आप क्या करेंगे ? मान लीजिए कि बच्चा ऐसा जोर करे कि आपको मारकर वह आग में जा पड़े, तब तो आग में पड़े बिना वह रहेगा ही नहीं। इसका उपाय आपके पास यह है: या तो आग में पड़ने से रोकने के लिए आप उसके प्राण ले लें या उसका आग में पड़ना आपसे देखा नहीं जाता इसलिए आप स्वयं आग में पड़कर अपनी जान दे दें।

[हाशिए का पाठ / Sidebar Text]: बच्चों को रोकने में आप सिर्फ़ बच्चों का स्वार्थ देखते हैं। जिसके ऊपर आप अंकुश रखना चाहते हैं, उस पर उसके स्वार्थ के लिए ही अंकुश रखेंगे। यह मिसाल अंग्रेजों पर जरा भी लागू नहीं होती। आप अंग्रेजों पर जो हथियार बल का उपयोग करना चाहते हैं, उसमें आप अपना ही यानी प्रजा का स्वार्थ देखते हैं। उसमें दया जरा भी नहीं है।

[मुख्य पाठ (जारी)]: आप बच्चों के प्राण तो नहीं ही लेंगे। आपमें अगर संपूर्ण दया भाव न हो, तो मुमकिन है कि आप अपने प्राण नहीं देंगे, तो फिर लाचारी से आप बच्चों को आग में कूदने देंगे। इस तरह आप बच्चों पर हथियार-बल का उपयोग नहीं करते हैं। बच्चों को आप और किसी तरह रोक सकें तो रोकेंगे 109