हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज और वह बल कम दर्जे का, लेकिन हथियार बल ही होगा ऐसा भी आप न समझ लें। वह बल और ही प्रकार का है। उसी को समझ लेना है। बच्चों को रोकने में आप सिर्फ़ बच्चों का स्वार्थ देखते हैं। जिसके ऊपर आप अंकुश रखना चाहते हैं, उस पर उसके स्वार्थ के लिए ही अंकुश रखेंगे। यह मिसाल अंग्रेजों पर जरा भी लागू नहीं होती। आप अंग्रेजों पर जो हथियार बल का उपयोग करना चाहते हैं, उसमें आप अपना ही यानी प्रजा का स्वार्थ देखते हैं। उसमें दया जरा भी नहीं है। अगर आप यों कहें कि अंग्रेज जो नीच काम करते हैं वह आग है, वे आग में अज्ञान के कारण जाते हैं और आप दया से अज्ञानी को यानी बच्चों को उससे बचाना चाहते हैं, तो इस प्रयोग को आजमाने के लिए आपको जहाँ-जहाँ जो भी आदमी नीच काम करता होगा वहाँ-वहाँ पहुँचना होगा और सामने वाले के बच्चों के प्राण लेने के बजाय अपने प्राणों की आहुति देनी पड़े, इतना पुरुषार्थ आप करना चाहें तो कर सकते हैं, आप स्वतंत्र हैं। पर यह बात बिल्कुल असंभव है। 110