हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
DevanagariHindipublished150 पृष्ठ
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देश भक्ति मनुष्य का पहला गुण है। इसके बिना वह संसार में सिर उठाकर नहीं चल सकता। उस देशभक्ति का त्याग करना चाहिए जो दूसरे राष्ट्रों को आफ़त में डालकर बड़प्पन पाना चाहती है।
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