भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 116, कुल 150 में से

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पृष्ठ 116

हिन्द स्वराज्य अस्वाभाविक बातों को दर्ज करती है। सत्याग्रह स्वाभाविक है, इसलिए उसे दर्ज करने की ज़रूरत ही नहीं है। पाठक : आपके कहे मुताबिक तो यही समझ में आता है कि सत्याग्रह की मिसालें इतिहास में नहीं लिखी जा सकतीं। इस सत्याग्रह को ज्यादा समझने की ज़रूरत है। आप जो कुछ कहना चाहते हैं, उसे ज्यादा साफ़ शब्दों में कहेंगे तो अच्छा होगा। संपादक : सत्याग्रह या आत्मबल को अंग्रेजी में 'पैसिव रेजिस्तेन्स' कहा जाता है। जिन लोगों ने अपने अधिकार पाने के लिए खुद दुःख सहन किया था, उनके दुःख सहने के ढंग के लिए यह शब्द बरता गया है। उसका ध्येय लड़ाई अगर लोग एक बार के ध्येय से उल्टा है। जब मुझे कोई काम पसन्द न सीख लें कि जो आये और वह काम मैं न करूँ, तो उसमें मैं सत्याग्रह कानून हमें अन्यायी या आत्मबल का उपयोग करता हूँ। मालूम हो उसे मानना मिसाल के तौर पर मुझे लागू होने वाला कोई नामर्दगी है, तो हमें कानून सरकार ने पास किया। वह कानून मुझे किसी का भी जुल्म पसन्द नहीं है। अब अगर मैं सरकार पर हमला बाँध नहीं सकता। यही करके यह कानून रद्द करवाता हूँ, तो कहा जाएगा स्वराज्य की कुंजी है। कि मैंने शरीर बल का उपयोग किया। अगर मैं उस कानून को मंजूर ही न करूँ और उस कारण से होने वाली सज़ा भुगत लूँ, तो कहा जाएगा कि मैंने आत्मबल या सत्याग्रह से काम लिया। सत्याग्रह में मैं अपना ही बलिदान देता हूँ। यह तो सब कहेंगे कि दूसरे का बलिदान लेने से अपना बलिदान देना ज्यादा अच्छा है। इसके सिवा सत्याग्रह से लड़ते हुए अगर लड़ाई गलत ठहरी तो सिर्फ़ लड़ाई छेड़ने वाला ही दुःख भोगता है यानी अपनी भूल की सज़ा वह खुद भोगता है। ऐसी कई घटनाएँ हुई हैं जिनमें लोग गलती से शामिल हुए थे। कोई भी आदमी दावे से यह नहीं कह सकता कि फलां काम खराब ही है, लेकिन जिसे वह खराब लगा, उसके लिए तो वह खराब ही है। अगर ऐसा ही है तो फिर उसे वह काम नहीं करना चाहिए और उसके लिए दुःख भोगना, कष्ट सहन करना चाहिए। यही सत्याग्रह की कुंजी है। 115