हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 117, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज्य पाठक : तब तो आप कानून के ख़िलाफ होते हैं ! यह बेवफाई कही जाएगी । हमारी गिनती हमेशा कानून को मानने वाली प्रजा में होती है । आप तो 'एक्स्ट्रीमिस्ट' से भी आगे बढ़ते दीखते हैं । 'एक्स्ट्रीमिस्ट' कहता है कि जो कानून बन चुके हैं उन्हें तो मानना ही चाहिए, लेकिन कानून खराब हो तो उनके बनाने वालों को मारकर भगा देना चाहिए । संपादक : मैं आगे बढ़ता हूँ या पीछे रहता हूँ, इसकी परवाह न आपको होनी चाहिए, न मुझे । हम तो जो अच्छा है उसे खोजना चाहते हैं और उसके मुताबिक बरतना चाहते हैं । ठगों के गाँव में अगर हम कानून को मानने वाली प्रजा हैं, इसका सही बहुत से लोग यह कहें अर्थ तो यह है कि हम सत्याग्रही प्रजा हैं । कानून जब कि ठग विद्या सीखनी पसन्द न आये तब हम कानून बनाने वालों का सिर ही चाहिए, तो क्या नहीं तोड़ते, बल्कि उन्हें रद्द कराने के लिए खुद कोई साधु ठग बन उपवास करते हैं, खुद दुःख उठाते हैं । जाएगा ? हरगिज़ नहीं । हमें अच्छे या बुरे कानून को मानना चाहिए, ऐसा अन्यायी कानून को अर्थ तो आजकल का है । पहले ऐसा नहीं था । तब मानना चाहिए, यह चाहे जिस कानून को लोग तोड़ते थे और उसकी सज़ा वहम जब तक दूर नहीं भोगते थे । होता तब तक हमारी कानून हमें पसन्द न हो तो भी उनके मुताबिक गुलामी जाने वाली नहीं चलना चाहिए, यह सिखावन मर्दानगी के ख़िलाफ है और इस वहम को है, धर्म के ख़िलाफ है और गुलामी की हद है । सिर्फ़ सत्याग्रही ही दूर सरकार तो कहेगी कि हम उसके सामने नंगे कर सकता है । होकर नाचें । तो क्या हम नाचेंगे ? अगर मैं सत्याग्रही होऊँ तो सरकार से कहूँगा “यह कानून आप अपने घर में रखिये । मैं न तो आपके सामने नंगा होने वाला हूँ और न नाचने वाला हूँ।” लेकिन हम ऐसे असत्याग्रही हो गये हैं कि सरकार के जुल्म के सामने झुककर नंगे होकर नाचने से भी ज्यादा नीच काम करते हैं । जिस आदमी में सच्ची इन्सानियत है, जो खुदा से ही डरता है, वह और किसी से नहीं डरेगा । दूसरे के बनाये हुए कानून उसके लिए बंधन कारक नहीं होते । बेचारी सरकार भी नहीं कहती कि 'तुम्हें ऐसा करना ही पड़ेगा' वह कहती है कि 'तुम ऐसा नहीं करोगे तो तुम्हें सज़ा होगी ।' हम अपनी अधम दशा के कारण मान लेते हैं कि हमें 'ऐसा ही करना चाहिए,' यह हमारा 116