हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 120, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज्य भी बड़ा परिणाम ला सकती है। उसको जंग नहीं लग सकती। उसे कोई चुराकर ले नहीं जा सकता। अगर सत्याग्रही दूसरे सत्याग्रही के साथ होड़ में उतरता है, तो उसमें उसे थकान लगती ही नहीं। सत्याग्रही की तलवार को म्यान की ज़रूरत नहीं रहती। उसे कोई छीन नहीं सकता। फिर भी सत्याग्रह को आप कमज़ोरों का हथियार मानें तो उसे अंधेर ही कहा जाएगा। पाठक : आपने कहा कि वह हिन्दुस्तान का खास हथियार है। तो क्या हिन्दुस्तान में तोप के बल का कभी उपयोग नहीं हुआ है? संपादक : आप हिंदुस्तान का अर्थ मुट्ठीभर राजा कहते हैं। मेरे मन में तो हिन्दुस्तान का अर्थ वे करोड़ों किसान हैं, जिनके सहारे राजा और हम सब जी रहे हैं। राजा तो हथियार काम में लाएँगे ही। उनका जान बचाने के लिए झूठ वह रिवाज ही हो गया है। उन्हें हुक्म चलाना है, बोलना चाहिए या नहीं, लेकिन हुक्म मानने वाले को तोपबल की ज़रूरत ऐसा सवाल यहाँ मन में नहीं है। दुनिया के ज्यादातर लोग हुक्म मानने नहीं उठाना चाहिए। जिसे वाले हैं। उन्हें या तो तोप बल या सत्याग्रह का झूठ का बचाव करना है, बल सिखाना चाहिए। जहाँ वे तोपबल सीखते हैं वही ऐसे बेकार सवाल वहाँ राजा-प्रजा दोनों पागल जैसे हो जाते हैं। उठाता है। जिसे सत्य की जहाँ हुक्म मानने वालों ने सत्याग्रह करना सीखा ही राह लेनी है, उसके है वहाँ राजा का ज़ुल्म उसकी तीन गज की सामने ऐसे धर्म-संकट तलवार से आगे नहीं जा सकता और हुक्म मानने कभी आते ही नहीं। वालों ने अन्यायी हुक्म की परवाह भी नहीं की है। किसान किसी के तलवार बल के बस न तो कभी हुए हैं और न होंगे। वे तलवार चलाना नहीं जानते, न किसी की तलवार से वे डरते हैं। वे मौत को हमेशा अपना तकिया बनाकर सोने वाली महान प्रजा हैं। उन्होंने मौत का डर छोड़ दिया है, इसलिए सबका डर छोड़ दिया है। यहाँ मैं कुछ बढ़ा- चढ़ाकर तस्वीर खींचता हूँ, यह ठीक है लेकिन हम जो तलवार के बल से चकित हो गए हैं, उनके लिए यह कुछ ज्यादा नहीं है। बात यह है कि किसानों ने, प्रजा मंडलों ने अपने और राज्य के कारोबार में सत्याग्रह को काम में लिया है। जब राजा जुल्म करता है तब प्रजा रूठती है। यह सत्याग्रह ही है। 119