भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 119, कुल 150 में से

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पृष्ठ 119

हिन्द स्वराज्य संपादक : यह तो आपने बड़े अज्ञान की बात कही। सत्याग्रह सर्वोपरि बल है। वह जब तोप बल से ज्यादा काम करता है, तो फिर कमज़ोरों का हथियार कैसे माना जाएगा ? सत्याग्रह के लिए जो हिम्मत और बहादुरी चाहिए, वह तोप का बल रखने वाले के पास हो ही नहीं सकती। क्या आप यह मानते हैं कि डरपोक और कमज़ोर आदमी नापसन्द कानून को तोड़ सकेगा ? 'एक्स्टीमिस्ट' तोपबल-पशुबल के हिमायती हैं। वे क्यों कानून को मानने की बात कर रहे हैं ? मैं उनका दोष नहीं निकालता। वे दूसरी कोई बात कर ही नहीं सकते। वे खुद जब अंग्रेजों को मारकर राज्य करेंगे तब आपसे और हमसे जबरन् कानून मनवाना चाहेंगे। उनके तरीके के जो सत्य का सेवन नहीं लिए यही कहना ठीक है, लेकिन सत्याग्रही तो करता, वह सत्य का बल, कहेगा कि जो कानून उसे पसन्द नहीं हैं उन्हें वह सत्य की ताक़त कैसे स्वीकार नहीं करेगा, फिर चाहे उसे तोप के मुँह पर दिखा सकेगा ? इसलिए बाँधकर उसकी धज्जियाँ क्यों न उड़ा दी जाएँ। सत्य की तो पूरी- आप क्या मानते हैं ? तोप चलाकर सैकड़ों को पूरी ज़रूरत रहेगी ही। बड़े मारने में हिम्मत की ज़रूरत है या हँसते-हँसते तोप से बड़ा नुकसान होने पर के मुँह पर बँधकर धज्जियाँ उड़ने देने में हिम्मत भी सत्य को नहीं छोड़ा जा की ज़रूरत है ? खुद मौत को हथेली में रखकर जो सकता। सत्य के लिए चलता-फिरता है वह रणवीर है या दूसरों की मौत कुछ छिपाने को होता ही को अपने हाथ में रखता है वह रणवीर है ? नहीं। इसलिए सत्याग्रही यह निश्चित मानिए कि नामर्द आदमी घड़ी के लिए छिपी सेना भर के लिए भी सत्याग्रही नहीं रह सकता। की ज़रूरत नहीं होती। हाँ, यह सही है कि शरीर से जो दुबला हो वह भी सत्याग्रही हो सकता है। एक आदमी भी सत्याग्रही हो सकता है और लाखों लोग भी हो सकते हैं। मर्द भी सत्याग्रही हो सकता है, औरत भी हो सकती है। उसे अपना लश्कर तैयार करने की ज़रूरत नहीं रहती। उसे पहलवानों की कुश्ती सीखने की ज़रूरत नहीं रहती। उसने अपने मन को काबू में किया कि फिर वह वनराज सिंह की तरह गर्जना कर सकता है और जो उसके दुश्मन बन बैठे हैं उनके दिल इस गर्जना से फट जाते हैं। सत्याग्रह ऐसी तलवार है, जिसके दोनों ओर धार है। उसे चाहे जैसे काम में लिया जा सकता है। जो उसे चलाता है और जिस पर वह चलाई जाती है, वे दोनों सुखी होते हैं। वह खून नहीं निकालती, लेकिन उससे 118