भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 122, कुल 150 में से

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पृष्ठ 122

हिन्द स्वराज्य कमज़ोर हो जाता है। जिसका मन विषय में भटकता है, वह क्या शेर मारेगा? यह बात अनगिनत मिसालों से साबित की जा सकती है। तब सवाल यह उठता है कि घर-संसारी को क्या करना चाहिए? लेकिन ऐसा सवाल उठने की कोई ज़रूरत नहीं। घर-संसारी ने जो संग किया (स्त्री की सोहबत की) वह विषय-भोग नहीं है, ऐसा कोई नहीं कहेगा। संतान पैदा करने के लिए ही अपनी स्त्री का संग करने की बात कही गयी है और सत्याग्रही को संतान पैदा करने की इच्छा नहीं होनी चाहिए। इसलिए संसारी होने पर भी वह ब्रह्मचर्य का पालन कर सकता है। यह बात ज्यादा खोलकर लिखने की ज़रूरत नहीं। स्त्री का क्या विचार है? यह सब कैसे हो सकता है? ऐसे सत्य का सबसे विचार मन में पैदा होते हैं। फिर भी जिसे महान कार्यों बड़ा प्रमाण तो यही में हिस्सा लेना है, उसे तो ऐसे सवालों का हल ढूँढना है कि दुनिया लड़ाई ही होगा। के हंगामे के जैसे ब्रह्मचर्य की ज़रूरत है वैसे ही गरीबी को बावजूद टिकी हुई अपनाने की भी ज़रूरत है। पैसे का लोभ और सत्याग्रह है। इसलिए लड़ाई का सेवन दोनों साथ-साथ कभी नहीं चल सकते, के बल के बजाय लेकिन मेरा मतलब यह नहीं है कि जिसके पास पैसा है दूसरा ही बल वह उसे फेंक दे। फिर भी पैसे के बारे में लापरवाह रहने उसका आधार है। की ज़रूरत है। सत्याग्रह का सेवन करते हुए अगर पैसा चला जाये, तो चिन्ता नहीं करनी चाहिए। जो सत्य का सेवन नहीं करता, वह सत्य का बल, सत्य की ताक़त कैसे दिखा सकेगा? इसलिए सत्य की तो पूरी-पूरी ज़रूरत रहेगी ही। बड़े से बड़ा नुकसान होने पर भी सत्य को नहीं छोड़ा जा सकता। सत्य के लिए कुछ छिपाने को होता ही नहीं। इसलिए सत्याग्रही के लिए छिपी सेना की ज़रूरत नहीं होती। जान बचाने के लिए झूठ बोलना चाहिए या नहीं, ऐसा सवाल यहाँ मन में नहीं उठाना चाहिए। जिसे झूठ का बचाव करना है, वही ऐसे बेकार सवाल उठाता है। जिसे सत्य की ही राह लेनी है, उसके सामने ऐसे धर्म-संकट कभी आते ही नहीं। ऐसी मुश्किल हालत में आ पड़े तो भी सत्यवादी उसमें से उबर जाता है। अभय के बिना तो सत्याग्रही की गाड़ी एक कदम भी आगे नहीं चल सकती। अभय संपूर्ण और सब बातों के लिए होना चाहिए। जमीन-जायदाद 121