हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 30, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्वराज्य क्या है ? पाठक : कांग्रेस ने हिन्दुस्तान को एक राष्ट्र बनाने के लिए क्या किया, बंग- भंग से जागृति कैसे हुई ? अशान्ति और असंतोष कैसे फैले ? यह सब जाना । अब मैं यह जानना चाहता हूँ कि स्वराज्य के बारे में आपके क्या ख़्याल हैं । मुझे डर है कि शायद हमारी समझ में फ़र्क हो । संपादक : फ़र्क होना मुमकिन है । स्वराज्य के लिए आप-हम सब अधीर बन रहे हैं, लेकिन वह क्या है इस बारे में हम ठीक राय पर नहीं पहुँचे हैं। अंग्रेज़ों को निकाल बाहर करना चाहिए, यह विचार बहुतों के मुँह से सुना जाता है, लेकिन उन्हें क्यों निकालना चाहिए, इसका कोई ठीक ख़्याल किया गया हो ऐसा नहीं लगता । आपसे ही एक सवाल मैं पूछता हूँ। मान लीजिये कि हम माँगते हैं उतना सब अंग्रेज़ हमें दे दें तो फिर उन्हें यहाँ से निकाल देने की ज़रूरत आप समझते हैं ? [पार्श्व-उद्धरण:] मेहरबानी करके आप हमारे मुल्क से चले जाएँ। यह माँग वे कुबूल करें और हिन्दुस्तान से चले जाएँ, तब भी अगर कोई ऐसे अर्थ का अनर्थ करे कि वे यहीं रहते हैं, तो मुझे उसकी परवाह नहीं होगी। तब फिर हम ऐसा मानेंगे कि हमारी भाषा में कुछ लोग ‘जाना’ का अर्थ ‘रहना’ करते हैं। पाठक : मैं तो उनसे एक ही चीज माँगूँगा । वह है : मेहरबानी करके आप हमारे मुल्क से चले जाएँ। यह माँग वे कुबूल करें और हिन्दुस्तान से चले जाएँ, तब भी अगर कोई ऐसे अर्थ का अनर्थ करे कि वे यहीं रहते हैं, तो मुझे उसकी परवाह नहीं होगी। तब फिर हम ऐसा मानेंगे कि हमारी भाषा में कुछ लोग ‘जाना’ का अर्थ ‘रहना’ करते हैं। संपादक : अच्छा, हम मान लें कि हमारी माँग के मुताबिक अंग्रेज़ चले गये । उसके बाद आप क्या करेंगे ? पाठक : इस सवाल का जवाब अभी से ही दिया नहीं जा सकता । वे किस तरह जाते हैं, उस पर बाद की हालत का आधार रहेगा । मान लें कि आप कहते हैं, उस तरह वे चले गये, तो मुझे लगता है कि उनका बनाया हुआ 29