हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
पृष्ठ 31, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंहिन्द स्वराज विधान हम चालू रखेंगे और राज का कारोबार चलाएँगे। कहने से ही वे चले जाएँ तो हमारे पास लश्कर तैयार ही होगा, इसलिए हमें राजकाज चलाने में कोई मुश्किल नहीं आयेगी। संपादक : आप भले ही ऐसा मानें, लेकिन मैं नहीं मानूँगा। फिर भी मैं इस बात पर ज्यादा बहस नहीं करना चाहता। मुझे तो आपके सवाल का जवाब देना है। वह जवाब मैं आपसे ही कुछ सवाल करके अच्छी तरह दे सकता हूँ। इसलिए कुछ सवाल आपसे करता हूँ। हम अंग्रेज़ों को क्यों निकालना चाहते हैं?
(बाएँ हाशिए का पाठ / Callout): यह सवाल ही बेकार है। बाघ अपना रूप पलट दे तो उसकी भाई बन्दी से कोई नुकसान है? ऐसा सवाल आपने पूछा, यह सिर्फ वक्त बरबाद करने के खातिर ही। अगर बाघ अपना स्वभाव बदल सके, तो अंग्रेज़ अपनी आदत छोड़ सकते हैं। जो कभी होने वाला नहीं है वह होगा, ऐसा मानना मनुष्य की रीत ही नहीं है।
पाठक : इसलिए कि उनके राज-कारोबार से देश कंगाल होता जा रहा है। वे हर साल देश से धन ले जाते हैं। वे अपनी ही चमड़ी के लोगों को बड़े ओहदे देते हैं, हमें सिर्फ गुलामी में रखते हैं, हमारे साथ बेअदबी का बरताव करते हैं और हमारी ज़रा भी परवाह नहीं करते। संपादक : अगर वे धन बाहर न ले जाएँ, नम्र बन जाएँ और हमें बड़े ओहदे दें, तो उनके रहने में आपको कुछ हर्ज है? पाठक : यह सवाल ही बेकार है। बाघ अपना रूप पलट दे तो उसकी भाईबन्दी से कोई नुकसान है? ऐसा सवाल आपने पूछा, यह सिर्फ वक्त बरबाद करने के खातिर ही। अगर बाघ अपना स्वभाव बदल सके, तो अंग्रेज़ अपनी आदत छोड़ सकते हैं। जो कभी होने वाला नहीं है वह होगा, ऐसा मानना मनुष्य की रीत ही नहीं है। संपादक : कैनेडा को जो राजसत्ता मिली है, बोअर लोगों को जो राजसत्ता मिली है, वैसी ही हमें मिले तो ? पाठक : यह भी बेकार सवाल है। हमारे पास उनकी तरह गोला बारूद हो तब वैसा ज़रूर हो सकता है, लेकिन उन लोगों के जितनी सत्ता जब अंग्रेज़ हमें देंगे तब हम अपना ही झंडा रखेंगे। जैसा जापान वैसा हिन्दुस्तान। अपना 30