भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 32, कुल 150 में से

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पृष्ठ 32

हिन्द स्वराज्य जंगी बेड़ा, अपनी फौज और अपनी जाहोजलाली होगी और तभी हिन्दुस्तान का सारी दुनिया में बोलबाला होगा। संपादक : यह तो आपने अच्छी तस्वीर खींची। इसका अर्थ यह हुआ कि हमें अंग्रेजी राज्य तो चाहिए, पर अंग्रेज (शासक) नहीं चाहिए। आप बाघ का स्वभाव तो चाहते हैं, लेकिन बाघ नहीं चाहते। मतलब यह हुआ कि आप हिन्दुस्तान को अंग्रेज बनाना चाहते हैं और हिन्दुस्तान जब अंग्रेज बन जाएगा तब वह हिन्दुस्तान नहीं कहा जाएगा, लेकिन सच्चा इंग्लिस्तान कहा जाएगा। यह मेरी कल्पना का स्वराज्य नहीं है। पाठक : मैंने तो जैसा मुझे सूझता है वैसा आप बाघ का स्वभाव तो स्वराज्य बतलाया। हम जो शिक्षा पाते हैं वह चाहते हैं, लेकिन बाघ नहीं अगर कुछ काम की हो, स्पेन्सर, मिल वगैरह चाहते। मतलब यह हुआ महान लेखकों के जो लेख हम पढ़ते हैं वे कुछ कि आप हिन्दुस्तान को काम के हों, अंग्रेज़ों की पार्लियामेन्ट अंग्रेज बनाना चाहते हैं और पार्लियामेन्टों की माता हो, तो फिर बेशक मुझे हिन्दुस्तान जब अंग्रेज बन तो लगता है कि हमें उनकी नकल करनी जाएगा तब वह हिन्दुस्तान चाहिए, वह यहाँ तक कि जैसे वे अपने मुल्क नहीं कहा जाएगा, लेकिन में दूसरों को घुसने नहीं देते वैसे हम भी दूसरों सच्चा इंग्लिस्तान कहा को न घुसने दें। जाएगा। यह मेरी कल्पना यों तो उन्होंने अपने देश में जो किया है, का स्वराज्य नहीं है। वैसा और जगह अभी देखने में नहीं आता। इसलिए उसे तो हमें अपने देश में अपनाना ही चाहिए, लेकिन अब आप अपने विचार बतलाइए। संपादक : अभी देर है। मेरे विचार अपने आप इस चर्चा में आपको मालूम हो जाएँगे। स्वराज्य को समझना आपको जितना आसान लगता है उतना ही मुझे मुश्किल लगता है। इसलिए फिलहाल मैं आपको इतना ही समझाने की कोशिश करूँगा कि जिसे आप स्वराज्य कहते हैं वह सचमुच स्वराज्य नहीं है 31

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