हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
DevanagariHindipublished150 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 40
आज तक आम लोग, लाखों की संख्या में हमारे जीवन का पोषण करने के लिए मरते आए हैं, अब उनके जीवन का पोषण करने के लिए हमें मरना होगा। बेशक, उनके मरने में और हमारे मरने में बुनियादी फ़र्क़ होगा। वे बिन-जाने और अनिच्छापूर्वक मरे हैं। उनके इस विवश बलिदान ने हमें गिराया है। अब यदि हम ज्ञानपूर्वक और इच्छापूर्वक मरेंगे तो हमारा बलिदान हमें और हमारे समूचे राष्ट्र को ऊपर उठायेगा। यदि हम एक आज़ाद और स्वावलम्बी देश की तरह जीना चाहते हैं, तो इस आवश्यक बलिदान से हमें अपना क़दम पीछे नहीं हटाना चाहिए। 39