भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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किसानों को शहर के कृत्रिम जीवन और लकदक के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। उनकी सादगी और सरलता ही उनका भूषण है। किसान का शहर की ओर भागना उसकी असफलता का ढिंढोरा है। ऐसा करके वह घर का रहेगा न घाट का। 77